महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही राजनीतिक दांवपेच शुरू हो गए थे। भाजपा और शिवसेना सरकार बनाने को तैयार थे, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर उलझन बढ़ती चली गई। शिवसेना मुख्यमंत्री पद से कम के लिए तैयार नहीं थी और भाजपा को यह मंजूर नहीं था। शिवसेना ने तो मीठे-नमकीन बिस्किट की तरह 50:50 यानी ढाई-ढाई साल का प्रस्ताव भी रखा। लेकिन भाजपा नहीं मानी।
खींचतान का नतीजा यह रहा कि 30 साल पुराने भाजपा-शिवसेना गठबंधन में दरार आ गई। सरकार बनने में देरी होते देख राज्यपाल ने भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन पार्टी ने मना कर दिया। अब राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शिवसेना को बुलाया।
बस यही से शुरू हुआ राजनीतिक तमाशा। शिवसेना ने राज्यपाल से मुलाकात करने का फैसला किया। 11 नवंबर को सुबह से शुरू हुआ राजनीतिक धारावाहिक देर रात तक चलता रहा। समाचार चैनल पूरे खेल की लाइव कमेंट्री करते रहे। एक से बढ़कर एक दावों की हवा आई और गई। पूरा दिन मुंबई-दिल्ली में बैठकों, फोन कॉल्स और उतार-चढ़ाव से भरपूर रहा। लेकिन कांग्रेस की दिल्ली में शाम चार बजे से तीन घंटे तक चली बैठक के चलते शिवसेना को राज्यपाल द्वारा मिला वक्त निकल गया।
दूसरे दिन भी जारी रहे दांवपेच
दूसरे दिन यानी मंगलवार को भी राजनीतिक दांवपेच जारी रहे। सुबह एनसीपी के मुखिया शरद पवार से जब पूछा गया कि क्या कांग्रेस की तरफ से देर हो रही है तो उन्होंने कहा, 'मैं कांग्रेस से बात करूंगा।' इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिवसेना नेता अरविंद सावंत का केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा स्वीकार कर लिया। शिवसेना के एनडीए से अलग होने का संकेत देते हुए सावंत ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया था।
उधर मुंबई में एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और भाजपा नेता आशीष शेलार मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती शिवसेना सांसद संजय राउत से मिलने पहुंचे।
इसी बीच शिवसेना के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने दावा किया कि सरकार शिवसेना की ही आएगी। उन्होंने कहा है कि धीरे-धीरे माहौल बेहतर होगा और सेना सरकार बनाएगी।
ओवैसी ने भी किया हमला
उधर, एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'हम लोग ना भाजपा की अगुआई वाली सरकार को समर्थन देंगे और ना ही शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार को। हमलोग अपने स्टैंड पर कायम हैं। मुझे अब खुशी है कि कांग्रेस-एनसीपी शिवसेना को समर्थन देने जा रही है। इससे लोगों को पता चलेगा कि कौन सा दल किसका वोट काट रही है।'
जब ओवैसी से सवाल किया गया कि राज्य में एनसीपी की मुख्यमंत्री बनने की बात आती है तो उनकी पार्टी का रुख क्या होगा, तो उन्होंने कहा, 'पहले निकाह होगा उसके बाद सोचेंगे कि बेटा हो या बेटी। अभी तो निकाह ही नहीं हुआ, कुछ सोचने के लिए है ही नहीं। यह सब खेल हो रहा है।'
दोपहर होते-होते राज्यपाल के केंद्र सरकार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश भेजने की तैयारी को लेकर खबर मिलने पर शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाया। ठीक उसी समय दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के लिए ब्राजील रवाना होने से पहले कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई।
सभी टीवी चैनलों पर यह ब्रेकिंग फ्लैश होने लगी कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना तय हो चुका है। यह जानकारी सामने आते ही शिवसेना ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। पार्टी का आरोप है कि राज्यपाल भारतीय जनता पार्टी के इशारों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा को 48 घंटे का समय दिया था, जबकि शिवसेना और एनसीपी को केवल 24 घंटे दिए। लेकिन शाम होते-होते यह सस्पेंस भी समाप्त हो गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश को मानते हुए महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुमति दे दी। इसी के साथ लगभग 24 घंटे तक चला राजनीतिक ड्रामा थम गया है।