महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को विधान परिषद सदस्य मनोनीत करने को लेकर जारी गतिरोध के बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने नया दांव चला है। राज्यपाल ने कोरोना संकट के कारण टल चुके विधान परिषद की नौ सीटों पर चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है। इससे उद्धव ठाकरे को राज्यपाल द्वारा विधान परिषद सदस्य मनोनीत करने को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है। वहीं, कोश्यारी की इस मांग पर चुनाव आयोग ने शुक्रवार को बैठक करने का फैसला लिया है। जानकारी के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल होंगे।
राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने निर्वाचन आयोग को लिखे पत्र में कहा है कि महाराष्ट्र में राजनीतिक स्थिरता के लिए विधान परिषद की रिक्त नौ सीटों के लिए चुनाव की घोषणा की जाए। इन सीटों का कार्यकाल 24 अप्रैल को समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार ने कोरोना संकट में जारी लॉकडाउन को सरल करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसी दिशा-निर्देश के तहत केंद्र सरकार से बातचीत कर चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। चूंकि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अभी विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं इसलिए 27 मई से पहले उन्हें सदन का सदस्य चुना जाना आवश्यक है।
राज्यपाल के अनिश्चय की स्थिति को देखते हुए अचानक राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई थी। उद्धव ठाकरे ने एमएलसी मनोनीत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की थी। चर्चा है कि उद्धव ने मोदी से कहा था कि देश में कोरोना संकट के बीच राज्य को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, पीएम मोदी ने उन्हें इस पर गौर करने का आश्वासन दिया था।
संविधान के तहत मुख्यमंत्री या मंत्री को शपथ लेने के छह माह के अंदर विधान सभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी है। लेकिन उद्धव ठाकरे अभी तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। इसलिए उन्हें 28 मई से पहले विधायक बनना जरूरी है। विधायक नहीं बनने पर उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्र पद से इस्तीफा देना होगा। इसके बाद पुनः सरकार गठन की प्रक्रिया राज्यपाल के फैसले पर निर्भर होगा।
इस बीच राज्य की सत्ताधारी तीनों दलों के विधायक दल के नेताओं ने भी चुनाव आयोग को अलग-अलग पत्र भेज कर विधान परिषद की रिक्त नौ सीटों के लिए चुनाव कराने की मांग की है।
विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट कर कहा है कि हम राज्यपाल के इस निर्णय का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि इससे इस बात का भी पालन होगा कि राज्यपाल मनोनित विप सदस्य को मंत्री या मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहिए। फडणवीस ने मुख्यमंत्री ठाकरे को शुभकामना दी। उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ टीका टिप्पणी से कोई लाभ नहीं होता। लोकतंत्र में बातचीत से रास्ता निकलता है।