महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मुंबई में महाविद्यालय के छात्रों को श्रीमद्भागवत गीता वितरित करने का आदेश दिया है जिसको लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में बाकायदा परिपत्र जारी किया है, जिसके अनुसार मुंबई में नैक (एनएएसी) की ए और ए प्लस श्रेणी के गैर सरकारी सहायता प्राप्त 100 कॉलेजों में छात्रों को श्रीमद्भागवत गीता बांटी जाए।
उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी परिपत्र में छात्रों में श्रीमद्भागवत गीता वितरण संबंधी आदेश में यह भी कहा गया है कि महाविद्यालय के प्राचार्य इसकी रसीद भी विभाग को भेजें। इस पर कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं ने भाजपानीत सरकार पर शिक्षा विभाग के जरिए हिंदुत्ववादी एजेंडा लागू करने का आरोप लगाया है। विपक्ष ने सवाल किया कि कॉलेज के छात्रों को सिर्फ श्रीमद्भागवत गीता ही क्यों बंटी जा रही है।
देश धर्मनिरपेक्ष है इसलिए शैक्षणिक संस्थानों में धर्मनिरपेक्ष वातावरण होना चाहिए। विधानसभा में एनसीपी दल के नेता जयंत पाटिल ने शिक्षामंत्री विनोद तावड़े के धार्मिक ज्ञान पर ही सवाल उठा दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षामंत्री ने यह आदेश मीडिया में सुर्खियां पाने के लिए दिया है।
वहीं, शिक्षामंत्री विनोद तावड़े ने कहा कि कांग्रेस, एनसीपी और समाजवादियों को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या श्रीमद्भागवत गीता में श्रीकृष्ण ने गलत उपदेश दिया है। इसलिए छात्रों में इसे न बांटा जाए। साथ ही, उन्होंने सफाई दी कि सरकार की ओर से ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया है और न ही श्रीमद्भागवत गीता के लिए पैसे दिए गए हैं। भक्ति वेदांत बुक ट्रस्ट ने महाविद्यालयों में श्रीमद्भागवत गीता के 18 खंड का वितरण मुफ्त में किया है।
हालांकि ट्रस्ट ने राज्य सरकार के जरिए श्रीमद्भागवत गीता वितरित करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन, शिक्षा विभाग ने ट्रस्ट के माध्यम से वितरित करने को कहा। शिक्षा विभाग की ओर से केवल उन महाविद्यालयों की सूची दी गई थी जो ए और ए प्लस श्रेणी में आते हैं।