कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा कि बिना बैंड, बाजा, बारात के राज्य की सरकार बनाने का अवसर देकर आज की तारीख को इतिहास में काली स्याही से लिख दिया गया। पटेल का कहना है कि संविधान के मूल्य, सिद्धांतों की अवहेलना की गई। मूल्य, मान्यता, लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई गईं।
उन्होंने कहा कि एनसीपी-शिवसेना-कांग्रेस के बीच में सरकार बनाने की प्रक्रिया चल रही थी। हम सैद्धांतिक रूप से सहमत हुए। हमने बिना देरी किए शरद पवार, शिवसेना के साथ सहमति बनाई। हम 23 नवंबर को 12.30 बजे मिलने वाले थे, लेकिन उसके पहले सारा तमाशा हो गया। बेशर्मी की इंतेहा पार की गई। पटेल ने कहा कि हम तीनों साथ रहेंगे और भाजपा को सदन में हराएंगे।
बड़ा सवाल क्या एनसीपी ने राजनीतिक दल को राजनीति का मुर्गा बना दिया? या फिर अजीत पवार ने अपने चाचा शरद पवार को गच्चा दे दिया? फिलहाल इस समय बड़ा नुकसान शिवसेना को होता दिखाई दे रहा है। अपने सारे पत्ते खोलने के बाद फिलहाल शिवसेना के हाथ खाली हैं।
कांग्रेस ने भी एनसीपी, शिवसेना की प्रेसवार्ता से दूरी बनाई और उसने अलग से प्रेसवार्ता की। इस प्रेस वार्ता में अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खडग़े, केसी वेणुगोपाल, शुशील कुमार शिंदे सामने आए। अपना पक्ष रखा और चले गए।