महाराष्ट्र सरकार के कर्मचारियों ने आज अपनी हड़ताल वापस ले ली। कर्मचारी वेतन में बढ़ोतरी सहित विभिन्न मांगों को लेकर तीन दिनों की हड़ताल पर चले गए थे और राज्य प्रशासन से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने हड़ताल वापस ले ली है।
तृतीय और चतुर्थ वर्ग के करीब 17 लाख कर्मचारी विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार से हड़ताल पर थे। उनकी मांगों में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करना और खाली पदों को भरना शामिल है।
हड़ताल का आह्वान करने वाले संगठन के अध्यक्ष मिलिंद सरदेसमुख ने पीटीआई को बताया, ‘‘हमने पहले मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री से चर्चा की थी और आज मुख्य सचिव से बातचीत की। सरकार हमारी अधिकतर मांगों पर सहमत हो गई है।’’
उन्होंने दावा किया कि आरक्षण की मांग को लेकर मराठा समुदाय के प्रदर्शन के कारण राज्य में स्थिति अच्छी नहीं है और सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य तथा अन्य आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हैं।
सरदेसमुख ने कहा, ‘‘हमारी पहली प्राथमिकता लोगों की मदद करना है और इसलिए हमने अपना कदम पीछे खींचा है। सरकार ने हमें आश्वासन दिया है कि हमारी मांगें पूरी की जाएंगी।’’ तीन दिवसीय हड़ताल में जिला परिषद, शिक्षकों और सरकारी पार्षदों सहित विभिन्न विभागों के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया था।
मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने पिछले हफ्ते कहा था कि जनवरी 2019 से राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की अनुशंसाओं को लागू किया जाएगा।