महाराष्ट्र में राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता अजित पवार का शिंदे सरकार में शामिल होने के बाद हर जगह इसकी आलोचना हो रही है। राकांपा प्रमुख शरद पवार और अजित पवार दोनों ने ही मुंबई में अलग अलग जगहों पर बैठक बुलाई थी, जिसमें आधे से ज्यादा विधायक अजित पवार की बैठक में शामिल हुए थे। इस बैठक के बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
चव्हाण ने अजित पवार के शिंदे सरकार में शामिल होने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे उनके घर का मामला बताया है। उन्होंने कहा, 'पारिवारिक मतभेद होने से उसका असर राज्य की राजनीति पर भी पड़ता है। इतने सालों में शरद पवार ने सभी को जमीन से उठाकर इतना बड़ा नेता बनाया और आज इस तरह की बाते कही जा रही यह दुख की बात है। यह मतभेद वर्षों से चली आ रही कड़वाहट को दर्शाती है।'
उन्होंने आगे कहा कि शिंदे गुट के कुछ विधायक मंत्री बने थे, और जो रह गए थे वह मंत्री बनने का सपना देख रहे थे। हालांकि, वह अब इससे नाराज है उनमें से एक मंत्री ने तो वापस जाने की भी बात कही।
अजित पवार रविवार को शिंदे सरकार में शामिल हुए। इसे उन्होंने दल-बदल का उल्लंखन बताते हुए कहा, 'अजित पवार को साथ लेने की रणनीति दिल्ली में तय की गई थी। हमारी जानकारी के अनुसार एक-दो महीने के भीतर एकनाथ शिंदे के खिलाफ कार्रवाई होगी, जिसमें ये निलंबित होंगे। यहां दल बदल कानून का उल्लंखन हुआ है, जिसमें बचना मुश्किल है। ऐसे में ये 16 विधायक अब चले जाएंगे तो राज्य में नए मुख्यमंत्री की आवश्यकता होगी। इस स्थिति में भाजपा ने अजित पवार पर भरोसा जताया है।'
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में अनिश्चिचतता की स्थिति बनी हुई है, जिसमें कोई भी गुट खुश नहीं है। सभी के बीच कुर्सी के लिए नाराजगी है। बता दें कि बुधवार को जहां अजित पवार की बैठक में 35 विधायक शामिल हुए थे, तो वहीं शरद पवार की बैठक में महज 19 विधायक ही पहुंचे थे।