अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा ने स्पष्ट किया है कि राज्यसभा सीट के लिए किसी अन्य दल में शामिल होने की अटकलों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पद हासिल करने के लिए वह अपने वैचारिक रुख से समझौता नहीं करेंगी और भाजपा के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखेंगी। हाल ही में एनसीपी नेताओं के साथ हुई उनकी मुलाकात को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं, लेकिन राणा ने बताया कि उन्होंने पार्टी बदलने का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।
अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा ने मंगलवार को राज्यसभा सीट के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में शामिल होने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। नवनीत राणा ने जोर देकर कहा कि वह किसी भी पद के लिए अपनी राजनीतिक विचारधारा नहीं बदलेंगी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए काम करती रहेंगी।
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राणा ने फेसबुक पोस्ट में कहा कि वह भाजपा की ईमानदार और वफादार कार्यकर्ता हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले उन्होंने संसद के उच्च सदन की एक सीट पर होने वाले उपचुनाव के सिलसिले में मुंबई में एनसीपी अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के साथ ही राज्यसभा सदस्य पार्थ पवार से मुलाकात की थी।
सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी राज्यसभा सीट
सुनेत्रा पवार के सांसद पद से इस्तीफा देने के बाद उनकी खाली हुई राज्यसभा सीट पर उपचुनाव की जरूरत पड़ी। बारामती विधानसभा उपचुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने पिछले महीने उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। एनसीपी ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए महाराष्ट्र विधान परिषद के पूर्व सदस्य राजेंद्र जैन को उम्मीदवार बनाया है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि आठ जून थी।
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नवनीत राणा ने कहा, "मैं भारतीय जनता पार्टी की एक ईमानदार और वफादार कार्यकर्ता हूं। इसलिए मैं किसी भी पद के लिए अपनी विचारधारा नहीं बदलूंगी। मैं भाजपा के लिए ईमानदारी से काम करती रहूंगी।" उन्होंने कहा कि एनसीपी नेताओं सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार ने राज्यसभा के लिए उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करने की इच्छा जताई थी और उनके काम पर भरोसा भी व्यक्त किया था।
देवेंद्र फडणवीस को लेकर किया राणा का बड़ा दावा
हालांकि, उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव उनके एनसीपी में शामिल होने से जुड़ा था, जिसे वह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थीं। राणा ने कहा, "राज्यसभा उम्मीदवारी के लिए एनसीपी में प्रवेश की शर्त मुझे स्वीकार नहीं थी।"
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सुझाव पर उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सुनेत्रा पवार से मुलाकात की थी और अनुरोध किया था कि एनसीपी की राज्यसभा सीट भाजपा के लिए छोड़ दी जाए। हालांकि, यह प्रस्ताव साकार नहीं हो सका। राणा ने उच्च सदन के लिए उनके नाम पर विचार करने और उनकी क्षमता पर विश्वास जताने के लिए सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार का आभार जताया।