उत्तर भारतीय वोटों को साधने वाले वरिष्ठ नेता कृपाशंकर सिंह के ऐन मौके पर पार्टी छोड़ने से भी राज्य में कांग्रेस को धक्का लगा है। ऐसे में कांग्रेस के 2014 का भी प्रदर्शन न दोहरा पाने की स्थिति पैदा हो गई है। रोचक बात यह है कि राज्य नेताओं के आपसी विवादों के कारण जिन पांच नेता जिनमें नितिन राउत, यशोमति ठाकुर, मुजफ्फर हुसैन, बासवराज पाटिल और विश्वजीत कदम को महाराष्ट्र में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया, वे सभी चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें दूसरों के साथ समन्वय की फुर्सत नहीं है।
इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण दक्षिण कराड से, अशोक चव्हाण नांदेड के भोकर से, बालासाहेब थोरात संगमनेर से चुनाव मैदान में हैं। अशोक चव्हाण के क्षेत्र में तो 91 उम्मीदवार खडे हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार चंद्रपुर के ब्रह्मपुरी से चुनाव लड़ रहे हैं। जानकारों के अनुसार वर्तमान स्थिति में सभी वरिष्ठ नेताओं की प्राथमिकता पार्टी की स्थिति सुधारने से ज्यादा अपने क्षेत्र में जीतना है।
इसलिए उनका जोर दूसरे या जूनियर नेताओं के लिए प्रचार से ज्यादा खुद अपने क्षेत्र में ज्यादा समय बिताने का है। उधर, सुशील कुमार शिंदे भले ही राज्य में समन्वय समिति के अध्यक्ष हैं, परंतु उनकी बेटी प्रणीति दक्षिण सोलापुर से चुनाव लड़ रही हैं। शिंदे उनके प्रचार में जोरशोर से लगे हैं। उनका तर्क है कि हमने क्षेत्रवार समितियां बनाई हैं और मैं फोन पर सबके संपर्क में हूं।