फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CM Fadnavis: खाद्य तेल में मिलावट रुके और कारोबार भी चले, सरकार ने निकाला बीच का रास्ता; FDA को क्या निर्देश?

Mon, 24 Aug 2026 07:23 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

महाराष्ट्र में खाद्य तेल में मिलावट रोकने के लिए सरकार सख्त नियम बनाने की तैयारी में है। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पारंपरिक तेल कारोबारियों और छोटे दुकानदारों के हितों को भी बचाने की बात कही है। उन्होंने खाद्य एवं औषधि प्रशासन से ऐसी मानक संचालन प्रक्रिया बनाने को कहा है, जिससे मिलावट पर रोक लगे और छोटे कारोबार बंद होने से बचें। क्या सरकार सख्ती और कारोबार के बीच संतुलन बना पाएगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विज्ञापन
खाद्य तेल पर महाराष्ट्र सरकार का नया प्लान क्या? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए से खाद्य तेल में मिलावट रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार करने को कहा जाएगा। फडणवीस ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान कहा कि खाद्य तेल की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए, लेकिन पारंपरिक तेल कारोबारियों और छोटे खुदरा दुकानदारों के कारोबार को भी अनावश्यक नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

सरकार सख्ती और कारोबार के बीच संतुलन कैसे बनाएगी?

फडणवीस ने कहा कि सरकार इस मामले में बीच का रास्ता अपनाना चाहती है। उनका कहना है कि मिलावट रोकने के लिए गुणवत्ता के नियम सख्ती से लागू किए जाएंगे, लेकिन ऐसे कदम नहीं उठाए जाएंगे जिनसे पारंपरिक तेल विक्रेताओं का कारोबार ही बंद हो जाए। इसके लिए एफडीए को ऐसी एसओपी तैयार करने का निर्देश दिया जाएगा, जिसमें खाद्य सुरक्षा की जरूरतों के साथ छोटे कारोबारियों की चिंताओं का भी ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि तेल में मिलावट नहीं होनी चाहिए और साथ ही पारंपरिक कारोबार भी चलते रहने चाहिए।

एफडीए ने हाल में क्या चेतावनी दी थी?

इससे पहले एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने उपभोक्ताओं से खुला या बिना सील वाला खाद्य तेल नहीं खरीदने की अपील की थी। उन्होंने इसे असुरक्षित बताते हुए कहा था कि इस क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन और मिलावट के मामलों को देखते हुए अनुपालन आदेश जारी किया गया है। इसके बाद खाद्य तेल बेचने वाले कारोबारियों में चिंता बढ़ी थी। अब मुख्यमंत्री ने कहा है कि नियमों को इस तरह तैयार किया जाए कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो और छोटे तथा पारंपरिक कारोबारियों पर अनावश्यक असर न पड़े।

फडणवीस के मिडिल पाथ का क्या मतलब है?

मुख्यमंत्री के मुताबिक सरकार का उद्देश्य मिलावट के खिलाफ कार्रवाई को कमजोर करना नहीं है। उनका जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है जिसमें ग्राहकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य तेल मिले, जबकि छोटे कारोबारी जरूरी नियमों का पालन करते हुए अपना काम जारी रख सकें। एसओपी में गुणवत्ता, सुरक्षा और कारोबार से जुड़े नियमों को स्पष्ट करने की कोशिश होगी। इससे कारोबारियों को यह समझने में भी मदद मिल सकती है कि किन मानकों का पालन करना जरूरी है।

पानीपत स्मारक को लेकर भी क्या फैसला हुआ?

मंत्रिमंडल की बैठक में पानीपत में मराठा शौर्य की याद में प्रस्तावित स्मारक का मुद्दा भी सामने आया। फडणवीस ने बताया कि इस परियोजना के लिए महाराष्ट्र और हरियाणा की संयुक्त समिति बनाई जाएगी। महाराष्ट्र सरकार स्मारक के लिए जमीन पहले ही हासिल कर चुकी है। सरकार स्मारक के डिजाइन और इसके विकास से जुड़े काम में भी अपना योगदान देगी। इस परियोजना का उद्देश्य मराठा वीरता और पानीपत के ऐतिहासिक प्रसंग को स्मरण करना है।

क्या अब खाद्य तेल कारोबारियों को राहत मिलेगी?

फिलहाल सरकार ने एसओपी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। इसके बाद खाद्य तेल के कारोबार में गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े नियमों को लेकर स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकती है। सरकार का रुख यह है कि मिलावट पर सख्ती जरूरी है, लेकिन कार्रवाई का ऐसा तरीका भी होना चाहिए जिससे छोटे और पारंपरिक कारोबारियों की आजीविका पर सीधा संकट न आए। अब निगाह इस बात पर होगी कि एफडीए की नई एसओपी में गुणवत्ता जांच और कारोबारियों के लिए नियम किस तरह तय किए जाते हैं।

मराठी सीखने के लिए ड्राइवरों को विशेषज्ञ बनने की जरूरत नहीं- फडणवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को स्पष्ट किया कि ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता का उद्देश्य उन्हें भाषा का विशेषज्ञ बनाना नहीं, बल्कि रोजमर्रा के काम के लिए बुनियादी मराठी सिखाना है। उन्होंने कहा कि भाषा के आधार पर किसी के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फडणवीस ने कहा कि जरूरत पड़ने पर हिंदी भाषी चालकों को कामचलाऊ मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक किसी चालक का लाइसेंस रद्द नहीं किया गया है।
विज्ञापन


महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से राज्यभर में चालकों के मराठी ज्ञान की जांच शुरू की है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, जरूरी दक्षता नहीं होने पर पहले भाषा सीखने का मौका दिया जाएगा। नियमों का लगातार पालन नहीं करने पर लाइसेंस और बैज तीन महीने के लिए निलंबित किए जा सकते हैं और बाद में इन्हें रद्द भी किया जा सकता है। सरकार का कहना है कि अभियान का उद्देश्य किसी की आजीविका प्रभावित करना नहीं, बल्कि मराठी भाषा और राज्य की पहचान को बढ़ावा देना है।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें