प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुंबई जोनल ऑफिस-II ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत गत शुक्रवार को महाराष्ट्र के ठाणे, बारामती और नासिक में स्थित 16 अस्पतालों/आईवीएफ सेंटरों पर छापेमारी की है। ईडी की यह कार्रवाई 'अवैध मानव अंडा (ह्यूमन एग) निकालने वाले रैकेट' की चल रही जांच के सिलसिले में की गई थी।
ईडी ने यह जांच महाराष्ट्र के ठाणे स्थित बदलापुर (पूर्व) पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज एफआईआर और उसके बाद दाखिल चार्जशीट के आधार पर शुरू की है। इसमें मंजूषा वानखेड़े और 16 अन्य लोगों पर 'भारतीय न्याय संहिता' (बीएनएस), 2023 के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी करने, तथा 'असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट', 2021 और 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट', 1940 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। यह मामला एक ऐसे संगठित नेटवर्क से जुड़ा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को मानव अंडा (ह्यूमन एग) दान करने के लिए तैयार करता था।
इसके बाद, अलग-अलग प्रोप्राइटरशिप फर्मों के जरिए काम करने वाले 'डोनर-सप्लाई एजेंट', इन महिलाओं को विभिन्न आईवीएफ सेंटरों और 'असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी' (एआरटी) बैंकों तक पहुंचाते थे। इन महिलाओं को इसके बदले पैसे दिए जाते थे, जो आईवीएफ सेंटरों और एआरटी बैंकों द्वारा एजेंटों के माध्यम से पहुंचाए जाते थे। इस काम के लिए एजेंटों को भी कमीशन मिलता था। आगे की जांच से पता चला है कि डोनर्स की पहचान छिपाने, बार-बार एग डोनेशन कराने और उन्हें मेडिकल रूप से फिट दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
इन दस्तावेजों में आधार कार्ड, हलफनामे, सहमति पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, ब्लड टेस्ट रिपोर्ट और बीमा कागजात शामिल थे। आरोप है कि इन महिलाओं को महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के विभिन्न केंद्रों पर एग निकालने (ह्यूमन एग रिट्रीवल) के लिए भेजा गया, जिससे उन्हें गंभीर मेडिकल जोखिमों का सामना करना पड़ा। इस दौरान तय मेडिकल सुरक्षा नियमों को दरकिनार किया गया।
ईडी की कार्रवाई के दौरान 29 लाख रुपये नकद जब्त किए गए, जबकि बैंक लॉकर और म्यूचुअल फंड निवेश को फ्रीज कर दिया गया। इसके अलावा, मामले से जुड़े अहम दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी बरामद किए गए हैं। जांच के दौरान नए डोनर एजेंटों की भी पहचान हुई है। साथ ही, कई अचल संपत्तियों और बड़ी रकम वाले निवेशों का भी पता चला है।