विधानसभा अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दिया हवाला
विधानसभा अध्यक्ष ने सोमवार को कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई के फैसले में कहा कि भरत गोगावाले की शिवसेना के मुख्य सचेतक के रूप में नियुक्ति अवैध है। इस बात का कोई सत्यापन नहीं किया गया था कि उन्हें किसी राजनीतिक दल द्वारा नियुक्त किया गया था या नहीं।'
मुख्य सचेतक पर कही यह बात
विधानसभाध्यक्ष ने कहा कि गोगावाले को पार्टी का मुख्य सचेतक फिर नियुक्त किया जा सकता है यदि सर्वोच्च अदालत के निर्देश के मुताबिक उचित प्रक्रिया का पालन किया जाता है और राजनीतिक दल उन्हें फिर से नामित करता है। अदालत ने विधानसभाध्यक्ष को मुख्य सचेतक के रूप में फिर से नियुक्त करने से प्रतिबंधित नहीं किया है।
क्या है मामला?
पिछले साल महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के नेतृत्व वाली सरकार के गिरने के कारण शिवसेना-केंद्रित टकराव पर अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बहाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि उन्होंने विश्वास मत का सामना किए बिना इस्तीफा दे दिया था। शिंदे इससे पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली एमवीए सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। जून 2022 में शिंदे और 39 अन्य विधायकों ने अपनी पार्टी के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी, जिससे शिवसेना दो फाड़ हो गई। शिंदे बाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन से मुख्यमंत्री बने।