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Maharashtra Day 2020: 1960 में अस्तित्व में आया था महाराष्ट्र, जानिए इसका इतिहास

Fri, 01 May 2020 01:11 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, नई दिल्ली

सार

  • क्षेत्रफल: 3,07,713 वर्ग किलोमीटर
  • राजधानी: मुंबई
  • मुख्य भाषा: मराठी
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महाराष्ट्र दिवस - फोटो : Maharashtra Govt Portal
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विस्तार
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देश के राज्यों के भाषायी पुनर्गठन के फलस्वरूप एक मई, 1960 को महाराष्ट्र राज्य का प्रशासनिक प्रादुर्भाव हुआ था। यह राज्य आसपास के मराठी भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया, जोकि पहले चार अलग-अलग प्रशासनों के नियंत्रण में थे।

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इनमें मूल ब्रिटिश मुंबई प्रांत में शामिल दमन और गोवा के बीच का जिला, हैदराबाद के निजाम की रियासत के पांच जिले, मध्य प्रांत (मध्य प्रदेश) के दक्षिण आठ जिले तथा आसपास की ऐसी अनेक छोटी-छोटी रियासतें शामिल थीं, जो समीपवर्ती जिलों में मिल गईं थीं।

महाराष्ट्र प्रायद्वीपीय भारत के उत्तर में बसा हुआ है और भौगोलिक दृष्टि से एक समान है। यहां का मुंबई बंदरगाह अरब सागर का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है। भौतिक दृष्टि से यह राज्य मुख्यतः पठारी है। महाराष्ट्र पठारों का पठार है। इसके उठे हुए पश्चिमी किनारे सह्याद्रि पहाड़ियों का निर्माण करते हैं और समुद्र तट के समानांतर हैं तथा इसकी ढलान पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व की ओर धीरे-धीरे बढ़ती है।
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राज्य के उत्तरी भाग में सतपुड़ा की पहाड़ियां हैं, जबकि अजंता तथा सतमाला पहाड़ियां राज्य के मध्य भाग से होकर जाती हैं। अरब सागर महाराष्ट्र की पश्चिमी सीमा का प्रहरी है, जबकि गुजरात और मध्य प्रदेश इसके उत्तर में हैं। राज्य की पूर्वी सीमा पर छत्तीसगढ़ है और कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश इसके दक्षिण में हैं।

महाराष्ट्र का इतिहास

महाराष्ट्र के पहले प्रसिद्ध शासक सातवाहन (ईसा पूर्व 230 से 225 ईस्वी) थे जोकि महाराष्ट्र के संस्थापक थे। उन्होंने अपने पीछे बहुत से साहित्यिक, कलात्मक तथा पुरातात्विक प्रमाण छोड़े हैं। उनके शासनकाल में मानव जीवन के हर क्षेत्र में भरपूर प्रगति हुई।

इसके बाद वाकाटक आए, जिन्होंने सर्व-भारतीय साम्राज्य की स्थापना की। उनके शासनकाल में महाराष्ट्र में शिक्षा, कला तथा धर्म सभी दिशाओं में विकास हुआ। उनके शासन के दौरान ही अजंता की गुफाओं में उच्च कोटि के भित्तिचित्र बनाए गए। वाकाटकों के बाद कुछ समय के लिए कलचुरी वंश ने शासन किया और फिर चालुक्य सत्ता में आए। इसके बाद तटवर्ती इलाकों में शिलाहारों के अलावा महाराष्ट्र पर राष्ट्रकूट तथा यादव शासकों का नियंत्रण रहा। यादवों ने मराठी को शासन की भाषा बनाया और दक्षिण के एक बड़े भाग पर अपना आधिपत्य कायम किया।

हालांकि बहमनी शासकों ने महाराष्ट्र तथा इसकी संस्कृति को कुछ हद तक समन्वित किया, पर शिवाजी के कुशल नेतृत्व में महाराष्ट्र का सर्वांगीण विकास हुआ और यह एक अलग पहचान के साथ उभरकर सामने आया। शिवाजी ने स्वराज तथा राष्ट्रीयता की एक नई भावना पैदा की। उनकी प्रचंड शक्ति ने मुगलों को भारत के इस भाग में आगे नहीं बढ़ने दिया। पेशवाओं ने दक्षिण के पठार से लेकर पंजाब पर हमला बोलकर मराठाओं का आधिपत्य स्थापित किया।

स्वतंत्रता संग्राम में महाराष्ट्र सबसे आगे था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का जन्म भी यहीं हुआ। मुंबई तथा महाराष्ट्र के अन्य शहरों के अनगिनत नेताओं ने पहले तिलक और बाद में महात्मा गांधी के मार्गदर्शन में कांग्रेस के आंदोलन को आगे बढ़ाया। गांधीजी ने भी अपने आंदोलन का केंद्र महाराष्ट्र को बनाया था और गांधी युग में राष्ट्रवादी देश की राजधानी सेवाग्राम थी।

पर्यटन स्थल

राज्य के महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र हैं:

  • अजंता
  • एलोरा
  • एलिफेंटा
  • कन्हेरी और कारला गुफाएं
  • महाबलेश्वर
  • माथेरन और पंचगनी
  • जवाहर
  • मालशेजघाट
  • अंबोली
  • चिकलधारा और पन्हाला पर्वतीय स्थल।


पंढरपुर, नासिक, शिरडी, नांदेड़, औधानागनाथ, त्र्यंबकेश्वर, तुलजापुर, गणपतिपुले, भीमशंकर, हरिहरेश्वर, शेगांव, कोल्हापुर, जेजुरी तथा अंबजोगई प्रसिद्ध धार्मिक स्थान हैं।

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