शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सूले राजनीति में अपने चचेरे भाई की प्रतिस्पर्धी बताई जा रही थी और अजीत पवार अपनी उसी चचेरी बहन से भाई का प्यार लेकर लिपट गए। एनसीपी सुप्रीमो ने अपना खोया भतीजा वापस पा लिया। साथ ही, उन्होंने महाराष्ट्र की सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी पाई, राजनीतिक साख बनाई और अब चर्चा है कि भतीजा अजीत पवार ही महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री बनेगा।
एनसीपी के बड़े नेताओं में एक छगन भुजबल ने अमर उजाला से कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शरद पवार ने खुद को साबित कर दिया है। वे कहते हैं कि वह अपने कद के अकेले नेता हैं।
भाजपा को उसी की भाषा में जवाब देना चाहते थे पवार
एनसीपी के रणनीतिकार कहते हैं कि अजीत पवार जब महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के खेमे में चले गए थे, तो यह जानकर शरद पवार को कोई हैरानी नहीं हुई। उन्होंने सबसे पहले एनसीपी के कुछ नेताओं की ही नब्ज टटोली, इसके बाद आगे बढ़ गए। अजीत पवार को अंत तक मनाने, एनसीपी के साथ लाने के लिए भी शरद पवार ने हर कोशिश की। यह पूछने पर कि ऐसा क्यों किया तो कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद बीके हरिप्रसाद कहते हैं कि यही तो राजनीति है और नेता का कद बनाती है।
एनसीपी के एक सांसद का कहना है कि शरद पवार ने इस बार गहरी चोट महसूस की थी। वह भाजपा को उसी की भाषा में जवाब देना चाहते थे। यह शरद पवार की रणनीति थी कि अजीत पवार एनसीपी में लौटें और भाजपा का साथ छोड़ें। ऐसा होने पर भाजपा को गहरी चोट लगेगी। उसकी साख पर असर होगा और देवेंद्र फडणवीस सरकार सदन में बहुमत का सामना नहीं करेगी। फडणवीस पहले ही इस्तीफा दे देंगे और अंततः यही हुआ।
नुकसान भाजपा का हुआ
महाराष्ट्र के घटनाक्रम पर भाजपा के नेता खुलकर चर्चा नहीं करना चाहते, लेकिन कुछ बड़े नेताओं को इसकी खीझ है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी सफाई दी है, लेकिन वह केवल वैधानिक पक्ष की चर्चा कर रहे हैं। पार्टी के एक पूर्व अध्यक्ष को लग रहा है कि ओपनिंग से लेकर पूरा मैच ही गलत खेला गया। सूत्रों का कहना है कि यह राजनीति है और यहां थोड़े समय बाद लोग भूल जाते हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं के आत्मबल पर इसका असर पड़ता है।
एक अन्य भाजपा सांसद ने माना है कि इसका महाराष्ट्र में कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ सकता है। सूत्र का कहना है कि भाजपा के साथ-साथ महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस का कद भी हल्का हुआ। अब पार्टी में एक चर्चा यह भी जोर पकड़ रही है कि फडणवीस के इगो के कारण महाराष्ट्र में संकट बढ़ा था।