महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही हलचल के बीच कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के साथ गठबंधन नहीं करेगी। पार्टी ने कहा कि वह उन संगठनों के साथ हाथ नहीं मिलाएगी जो कानून हाथ में लेते हैं या लोगों को डराते हैं। कांग्रेस के इस रुख के बाद विपक्षी खेमे में नई राजनीतिक दूरी और सियासी समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है।
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद यह फैसला लिया है कि वह बीएमसी चुनाव अकेले लड़ेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की लंबे समय से शरद पवार की अगुआई वाले एनसीपी (एसपी) के साथ साझेदारी रही है, लेकिन कानून तोड़ने वालों से गठबंधन नहीं होगा। उनका यह बयान सीधे तौर पर राज ठाकरे की पार्टी मनसे की ओर इशारा माना गया। कांग्रेस के रुख के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने पार्टी को जल्दबाजी न करने और विपक्षी एकता बनाए रखने की सलाह दी थी।
हम स्वतंत्र, किसी पर निर्भर नहीं- मनसे नेता
कांग्रेस के इनकार के जवाब में मनसे नेता संदीप देशपांडे ने कहा कि उनकी पार्टी किसी के दबाव में नहीं है और न ही महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है। उन्होंने साफ कहा कि राज ठाकरे जो फैसला लेते हैं वही पार्टी का रुख होता है और कांग्रेस के बयान से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। देशपांडे के अनुसार, मनसे अपनी राजनीतिक रणनीति खुद तय करती है और उनकी पार्टी को किसी की मंजूरी की जरूरत नहीं।
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उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक को लेकर सतर्कता
कांग्रेस के भीतर एक बड़ा वर्ग मनसे के साथ किसी भी तरह के गठबंधन के खिलाफ है। पार्टी के नेताओं को आशंका है कि यदि वे मनसे के साथ मंच साझा करते हैं, तो मुंबई में उनका उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बैंक प्रभावित हो सकता है। इसी कारण कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से गठबंधन की संभावनाओं को नकारते हुए कहा कि वह ऐसे दलों को अपने साथ नहीं रख सकती जो वर्षों से कानून को ताक पर रखकर राजनीति करते रहे हैं।
सवालों से बचती दिखीं वर्षा गायकवाड़
जब वर्षा गायकवाड़ से पूछा गया कि क्या शरद पवार कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और मनसे को साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि पवार का सभी दलों में सम्मान है, लेकिन कांग्रेस ने ऐसे किसी गठबंधन पर चर्चा नहीं की है। उन्होंने कहा कि काल्पनिक सवालों का कोई अर्थ नहीं। गायकवाड़ ने सुप्रिया सुले के उस बयान पर भी सीधे प्रतिक्रिया देने से बचा, जिसमें उन्होंने सभी विपक्षी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात कही थी।