भाजपा ने कहा, कार्रवाई गलत लगती है तो अदालत जाइए
इसी बीच, महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने पुणे में इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर एनसीपी और एमवीए के अन्य सदस्यों को यह लगता है कि ईडी ने जो कार्रवाई की है वह सत्ता का दुरुपयोग है तो वह न्याय की मांग के साथ अदालत का रुख कर सकते हैं।
पाटिल ने कहा, 'अन्याय पिछले 27 महीने से हमारे साथ हो रहा है, लेकिन जब हमारे 12 विधायक निलंबित किए गए थे तब हम अदालत गए थे और हमें न्याय मिला था। इसी तरह, अगर उन्हें लगता है कि उत्पीड़न हो रहा है तो उन्हें अदालत के पास जाना चाहिए।' इस दौरान उन्होंने अनिल देशमुख का जिक्र भी किया।
भाजपा नेता ने कहा कि महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और एनसीपी नेता अनिल देशमुख को जब गिरफ्तार किया गया था, तब भी ऐसे ही चीख-पुकार मची थी। लेकिन बाद में सब खत्म हो गया। उन्होंने यह दावा भी किया कि देशमुख ने कहा है कि अगर मैं अपना मुंह खोलूंगा तो यह एमवीए के लिए बहुत महंगा पड़ जाएगा।
इसके साथ ही पाटिल ने मलिक के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा, गिरफ्तार होने के बाद अब मलिक के पास कैबिनेट मंत्री के पद पर बने रहने के लिए कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है। मैं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से अनुरोध करना चाहूंगा कि उनके इस्तीफे पर जल्द से जल्द फैसला लिया जाए।
पवार बोले- मलिक को आवाज उठाने की मिल रही सजा
इससे पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी आज कहा कि मलिक को इसलिए परेशान किया जा रहा है क्योंकि वह केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के बारे में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जब मैं महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री था, तब मेरे खिलाफ भी इसी तरह का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही थी।
पवार ने कहा, 'उन्होंने कौन सा मामला शुरू किया है? सीधी सी बात है। अगर कोई मुस्लिम कार्यकर्ता होता है (जिसके खिलाफ कोई मामला शुरू किया जाता है) तो वह दाऊद का नाम ले लेते हैं... (संबंधित कार्यकर्ता और अंडरवर्ल्ड के बीच) कोई संबंध नहीं होता लेकिन इसके बाद भी ऐसा किया जाता है।'
पवार की इस टिप्पणी पर पाटिल ने एनसीपी प्रमुख पर जातिवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'कभी वह मराठा और गैर मराठा लोगों के साथ ऐसा करते हैं। कभी वह अल्पसंख्यकों और गैर अल्पसंख्यकों के साथ ऐसा करते हैं। लेकिन पिछले 50 साल से चल रही ऐसी राजनीति को जनता समझती है।'