महाराष्ट्र में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए काग्रेस-एनसीपी के बीच गठबंधन की कवायद शुरू हो गई है। लेकिन, दोनों दलों के बीच गहरी हुई खाई अभी तक पट नहीं पाई है। कांग्रेस-एनसीपी के नेताओं की लंबी बैठक के बावजूद गठबंधन पर बात नहीं बन पा रही है। हालांकि दोनों दलों के बीच यह आमराय बन चुकी है कि सेकुलर वोटों में विभाजन को टालने के लिए आगामी लोकसभा चुनाव एक साथ मिलकर लड़ना चाहिए लेकिन, गठबंधन का फैसला अधर में है।
दरअसल, साल 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। इससे दोनों दलों के बीच गहरी खाई बन गई थी। कांग्रेस और एनसीपी के बीच की यह खाई अभी पट नहीं पाई है। इसलिए संदेह बरकरार है। वहीं, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि एनसीपी अक्सर सत्तापक्ष के साथ खड़ी दिखाई देती है। इसलिए दोनों ही दल एक दूसरे को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं।
मंगलवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल के सरकारी आवास पर कांग्रेस-एनसीपी के प्रमुख नेताओं की देर रात तक बैठक चली। लेकिन, बैठक बेनतीजा खत्म हो गई। अब कहा जा रहा है कि गठबंधन का फैसला राष्ट्रीय स्तर पर होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री चव्हाण बोले हम भाई-भाई
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि हम सेकुलर वोटों का विभाजन टालना चाहते हैं। हम सबका प्रयास है कि भाजपा-शिवसेना का सामना करना है तो सभी को साथ आना होगा। वर्ष 2019 के चुनाव के लिए हम तैयारी कर रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ने की वजह से दोनों दलों में आई खटास दूर हो गई है। इस पर चव्हाण ने कहा हम भाई-भाई हैं।