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महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी के विधायकों के टूटने का खतरा, भाजपा में हो सकते हैं शामिल

Tue, 16 Jul 2019 07:54 PM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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कांग्रेस-एनसीपी (प्रतीकात्मक) - फोटो : सोशल मीडिया
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कर्नाटक-गोवा के बाद महाराष्ट्र में भी कांग्रेस और एनसीपी के सामने विधायकों के टूटने का खतरा मंडरा रहा है। यह संकट सितंबर-अक्तूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ गहरा रहा है। दोनों पार्टियों के सामने भाजपा-शिवसेना के अतिरिक्त प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी से भी विधायकों को बचाने की चुनौती है। मुंबई में मंगलवार को बंद दरवाजों में कांग्रेस-एनसीपी के वरिष्ठ नेता जब विधानसभा चुनावों की रणनीति बनाने के लिए जुटे तो विधायकों को साथ जोड़े रखने की कवायद पर काफी चर्चा हुई।

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सूत्रों के अनुसार कांग्रेस-एनसीपी के पांच विधायक जल्द ही भाजपा में शामिल होने की घोषणा कर सकते हैं। वहीं टिकट बंटवारे पर नजर लगाए एक दर्जन से ज्यादा विधायक कभी भी पाला बदल सकते हैं। कांग्रेस-एनसीपी में इस बार 288 विधानसभा सीटों में बराबर बंटवारे की चर्चा है। जबकि पिछली बार दोनों अकेले लड़े थे। कांग्रेस ने 287 और एनसीपी ने 278 उम्मीदवार उतारे थे। 

महाराष्ट्र कांग्रेस लगातार कह रही है कि भाजपा उसके विधायकों को तोड़ने की फिराक में हैं और खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कांग्रेसी विधायकों को फोन कर रहें हैं। लेकिन नई समस्या वंचित बहुजन अघाड़ी की है। सूत्रों की मानें तो आंबेडकर ने कांग्रेस-एनसीपी के विधायकों से मुलाकातें शुरू कर दी हैं। जिन विधायकों के टिकट कांग्रेस-एनसीपी में कटेंगे, वे भाजपा की तरफ से भाव न मिलने पर सीधे वंचित बहुजन अघाड़ी का रुख करें तो आश्चर्य नहीं होगा।

कांग्रेस बिग ब्रदर नहीं

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बैठक में हुई चर्चा के मुताबिक कांग्रेस विधानसभा चुनाव में बिग ब्रदर के रोल में नहीं होगी। राज्य में 288 सीटें हैं। पिछली बार दोनों अलग-अलग लड़े थे। कांग्रेस को 42 और एनसीपी को 41 सीटें मिली थीं। वहीं हाल में हुए लोकसभा चुनावों में एनसीपी को चार और कांग्रेस को केवल एक सीट मिलने से स्थितियां बदल गई हैं। दोनों मिलकर यह चुनाव लड़े थे।

मनसे का सवाल


विधानसभा चुनावों में मनसे क्या कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में रहेगी, इस पर छाई धुंध जल्द ही हटेगी। पिछले दिनों महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। मनसे को साथ लेने में एनसीपी की दिलचस्पी अधिक है। सूत्रों की मानें तो सीट बंटवारे में एनसीपी राज ठाकरे के साथ अपनी सीटें शेयर करेगी, कांग्रेस नहीं।

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