परमबीर सिंह, अनिल देशमुख और शरद पवार
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महाराष्ट्र कांग्रेस के अधिकतर नेता उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी सरकार में बने रहना चाहते हैं। कुछ नेताओं का तर्क है कि ठाकरे सरकार को अस्थिर करने का सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। आशंका है कि इसके बाद हॉर्स ट्रेडिंग शुरू हो सकती है जिससे महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है।
दूसरी ओर, अनिल देशमुख पर लगे उगाही के आरोप से कांग्रेस हाईकमान चिंतित है। क्योंकि महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने के नाते भ्रष्टाचार में शामिल होने का दाग उसके दामन पर भी पड़ सकता है। लेकिन, प्रदेश नेतृत्व के प्रभाव में होने के कारण पार्टी ठोस निर्णय लेने से हिचक रही है।
उधर, गृहमंत्री अनिल देशमुख पर लगे आरोप को लेकर शिवसेना के नेताओं में भी अंदरखाने नाराजगी दिखाई दे रही है। शिवसेना के नेता व विधायकों का कहना है कि पूजा चव्हाण आत्महत्या मामले में शिवसेना विधायक व वनमंत्री संजय राठौड़ का इस्तीफा ले लिया गया, लेकिन एनसीपी के दो मंत्रियों के खिलाफ आरोप लगने के बावजूद इस्तीफा नहीं हुआ।
एक महिला ने जब सामाजिक न्याय मंत्री धनंजय मुंडे पर आरोप लगाया तो एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने पहले दिन इसे गंभीर मामला बताया, लेकिन इस्तीफे के मुद्दे पर दूसरे दिन पलट गए। इसी तरह गृहमंत्री अनिल देशमुख पर लगे आरोप को भी पवार ने गंभीर बताया था। लेकिन दूसरे दिन खुलकर उनके बचाव में आ गए। हालांकि शिवसेना के नेता खुलकर नहीं बोल रहे है, लेकिन वे चाहते हैं कि अनिल देशमुख का इस्तीफा लिया जाना चाहिए।