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महाराष्ट्रः  खाकी से वसूली के मुद्दे पर दुविधा में कांग्रेस, एनसीपी-शिवसेना का गठजोड़ मजबूत

Wed, 24 Mar 2021 12:11 AM IST
सुरेंद्र जोशी सुरेन्द्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई
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परमबीर सिंह, पूर्व पुलिस कमिश्नर, मुंबई - फोटो : AM
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महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ लगे 100 करोड़ की उगाही के आरोप के बाद महाविकास आघाड़ी सरकार में शामिल कांग्रेस दुविधा की स्थिति में है। कांग्रेस के लिए इधर कुआं तो उधर खाई वाली स्थिति है। वहीं, गृहमंत्री देशमुख के इस्तीफे के भारी दबाव के बावजूद शिवसेना-एनसीपी के बीच मजबूत गठजोड़ बन चुका हैं। दोनों इस बात पर अडिग हैं कि विपक्ष के आगे नहीं झुकेंगे। जबकि कांग्रेस पशोपेश में है।

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कांग्रेस को सताई चुनावी चिंता
मुंबई पुलिस को 100 करोड़ रुपए वसूली का टारगेट देने संबंधी पूर्व पुलिस आयुक्त परमवीर सिंह के पत्र से गृहमंत्री अनिल देशमुख आरोप के घेरे में हैं। इसलिए कांग्रेस के कुछ नेता चाहते हैं कि देशमुख के इस्तीफे को लेकर पार्टी को स्पष्ट भूमिका निभानी चाहिए। अन्यथा पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। 
 

एनसीपी-शिवसेना महाराष्ट्र तक सीमित
एनसीपी और शिवसेना महाराष्ट्र तक ही सीमित हैं। इसलिए इन दोनों ही पार्टियों को इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन कांग्रेस का दृष्टिकोण स्पष्ट होना चाहिए। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का इस बारे में बयान भी आ चुका है। उन्होंने कहा है कि 100 करोड़ की वसूली के टारगेट के आरोप के चलते गृहमंत्री अनिल देशमुख को इस्तीफा दे देना चाहिए। जांच के उपरांत निर्दोष पाए जाने पर उन्हें फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है, लेकिन महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने इसे उनका निजी बयान बताकर उनकी ही किरकिरी कर दी है। 

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सत्ता में बने रहना चाहते हैं कांग्रेस के नेता

परमबीर सिंह, अनिल देशमुख और शरद पवार - फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र कांग्रेस के अधिकतर नेता उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी सरकार में बने रहना चाहते हैं। कुछ नेताओं का तर्क है कि ठाकरे सरकार को अस्थिर करने का सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। आशंका है कि इसके बाद हॉर्स ट्रेडिंग शुरू हो सकती है जिससे महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है।

दूसरी ओर, अनिल देशमुख पर लगे उगाही के आरोप से कांग्रेस हाईकमान चिंतित है। क्योंकि महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने के नाते भ्रष्टाचार में शामिल होने का दाग उसके दामन पर भी पड़ सकता है। लेकिन, प्रदेश नेतृत्व के प्रभाव में होने के कारण पार्टी ठोस निर्णय लेने से हिचक रही है।
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शिवसेना नेताओं में भी नाराजगी

उधर, गृहमंत्री अनिल देशमुख पर लगे आरोप को लेकर शिवसेना के नेताओं में भी अंदरखाने नाराजगी दिखाई दे रही है। शिवसेना के नेता व विधायकों का कहना है कि पूजा चव्हाण आत्महत्या मामले में शिवसेना विधायक व वनमंत्री संजय राठौड़ का इस्तीफा ले लिया गया, लेकिन एनसीपी के दो मंत्रियों के खिलाफ आरोप लगने के बावजूद इस्तीफा नहीं हुआ। 

एक महिला ने जब सामाजिक न्याय मंत्री धनंजय मुंडे पर आरोप लगाया तो एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने पहले दिन इसे गंभीर मामला बताया, लेकिन इस्तीफे के मुद्दे पर दूसरे दिन पलट गए। इसी तरह गृहमंत्री अनिल देशमुख पर लगे आरोप को भी पवार ने गंभीर बताया था। लेकिन दूसरे दिन खुलकर उनके बचाव में आ गए। हालांकि शिवसेना के नेता खुलकर नहीं बोल रहे है, लेकिन वे चाहते हैं कि अनिल देशमुख का इस्तीफा लिया जाना चाहिए।
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