महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा। शिंदे ने कांग्रेस और उद्धव ठाकरे से अदाणी मुद्दे पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) सुप्रीमो शरद पवार के बयान पर ध्यान देने के लिए कहा। अमेरिका स्थित हिंडनबर्ग रिसर्च ने अरबपति गौतम अदाणी की फर्मों में बड़े पैमाने पर शेयरों में हेराफेरी और लेखा धोखाधड़ी का आरोप लगाया था, जिसके कारण विपक्षी कांग्रेस और अन्य लोगों ने नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध किया था। हालांकि, अदाणी समूह ने आरोपों का खंडन किया था।
एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में शरद पवार ने अदाणी समूह का समर्थन किया और इस समूह पर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों की आलोचना की। उन्होंने कहा, इस तरह के बयान पहले भी अन्य लोगों ने दिए थे और कुछ दिनों तक संसद में हंगामा भी हुआ था, लेकिन इस बार इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
पवार ने कहा, "जो मुद्दे उठाए गए, किसने उठाए, हमने बयान देने वाले इन लोगों के बारे में कभी नहीं सुना, इनकी क्या पृष्ठभूमि है। वे ऐसे मुद्दे उठाते हैं जो पूरे देश में हंगामा मचाते हैं। और इसकी लागत देश की अर्थव्यवस्था को चुकानी पड़ती है, हम इन बातों को नकार नहीं कर सकते। ऐसा लगता है कि यह टारगेट किया गया था।
कल्याण में एक प्रॉपर्टी एग्जिबिशन (Property Exhibition) के बाद शुक्रवार रात मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, अडाणी समूह में 20,000 करोड़ रुपये के स्पष्टीकरण की मांग को लेकर कांग्रेस ने आंदोलन शुरू किया। यहां तक कि उद्धव ठाकरे भी लगातार इस मुद्दे पर बोलते रहे। अब शरद पवार ने टिप्पणी की है और जो लोग विरोध कर रहे हैं उन्हें इन टिप्पणियों पर ध्यान देना चाहिए।
सीएम शिंदे ने कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी), जो महाविकास आघाडी में एनसीपी के साथ सहयोगी हैं, पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पवार बहुत वरिष्ठ राजनेता हैं और उन्होंने अडाणी के मुद्दे पर काफी अध्ययन के बाद यह बात कही होगी, इसलिए विरोध करने वालों को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
हमें देश के प्रति उनके योगदान के बारे में सोचने की जरूरत: पवार
राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने अदाणी मुद्दे पर जेपीसी के गठन की मांग को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कांग्रेस की ओर से बार-बार संसद में उठाई जा रही इस मांग से खुद को अलग करते हुए कहा कि इससे कुछ खास फायदा नहीं होगा। पवार ने कहा, मेरी पार्टी ने अदाणी मुद्दे पर जेपीसी का समर्थन किया है, लेकिन मुझे लगता है कि जेपीसी पर सत्तासीन पार्टी का कब्जा रहेगा, इसलिए इससे सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी। तो मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाला पैनल ज्यादा बेहतर तरीके से सच्चाई सामने ला सकता है।
पवार ने आगे कहा, "आज-कल अंबानी-अदाणी का नाम सरकार की आलोचना के लिए इस्तेमाल होने लगा है, लेकिन हमें देश के लिए उनके योगदान के बारे में सोचना चाहिए। मुझे लगता है कि हमारे लिए बेरोजगारी, महंगाई और किसानों का मुद्दा ज्यादा अहम है।"