पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ निकाय चुनावों में भाजपा की बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि जनता ने अजित पवार को नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के नेतृत्व को चुना है। हालांकि, चुनावों के दौरान अजित पावर ने कई बयानबाजी भाजपा के खिलाफ की। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर कई तंज भी कसे थे। फडणवीस के इस बयान से ये कहा जा सकता है कि दोनों के रिश्तो में नरमी लौट आई है।
महाराष्ट्र में शहरी निकाय चुनावों के नतीजों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में भाजपा की बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने साफ कहा कि जनता ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार को खारिज नहीं किया है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। फडणवीस ने इसे जनादेश नहीं, बल्कि जनता की जिम्मेदारी भी बताया।
विज्ञापन
पुणे में पत्रकारों से बातचीत में जब फडणवीस से पूछा गया कि अब पुणे का ‘दादा’ कौन है, तो उन्होंने कहा कि पुणे के लोग ही असली दादा हैं और हम सब उनके सेवक हैं। उन्होंने कहा कि इस जीत को किसी व्यक्ति की हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह जनादेश भाजपा के विकास और सुशासन के एजेंडे के समर्थन में है। फडणवीस ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि वह इस भरोसे के लिए कृतज्ञ हैं।
चुनावी नतीजों ने क्या सियासी तस्वीर बदली?
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ चुनावों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों अजित पवार और शरद पवार ने मिलकर चुनाव लड़ा था। इसके बावजूद भाजपा ने पुणे नगर निगम की 165 में से 119 सीटें जीतकर बड़ा उलटफेर किया। अजित पवार गुट को 27 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि एनसीपी (एसपी) को सिर्फ तीन सीटें मिलीं। कांग्रेस को 15 सीटें मिलीं। पिंपरी-चिंचवड़ में भी भाजपा ने 128 में से 84 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
नतीजों के पीछे क्या कारण रहे?
फडणवीस के मुताबिक जनता ने भाजपा के विकास मॉडल पर भरोसा जताया।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को निर्णायक समर्थन मिला।
विपक्षी दलों की आपसी एकता भी भाजपा को रोक नहीं सकी।
चुनाव प्रचार के दौरान लगाए गए आरोपों को जनता ने नकार दिया।
शहरी मतदाता ने स्थिर सरकार और स्पष्ट नीति को प्राथमिकता दी।
जनादेश ने सभी अटकलों विराम लगा दिया
फडणवीस ने कहा कि इस जनादेश ने सभी अटकलों और अफवाहों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने माना कि नतीजे कई लोगों की उम्मीदों से कहीं आगे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जीत खुशी के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आई है। मेयर चुने जाने के तुरंत बाद विकास के वादों को जमीन पर उतारा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि अजित पवार ने मतदान के दिन ही कैबिनेट बैठक में शामिल न होने की जानकारी दे दी थी।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के नतीजों को महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा की मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है। फडणवीस के बयान से साफ संकेत मिलता है कि भाजपा इस जीत को व्यक्ति विरोधी नहीं, बल्कि नेतृत्व और नीति के समर्थन के रूप में पेश करना चाहती है। यह संदेश आने वाले चुनावों में भी भाजपा की रणनीति का आधार बन सकता है। कहा ये भी जा सकत है कि भाजपा और सीएम फडणवीस अब महयुति में सब ठीक करना चाह रहे हैं।