महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में भाजपा ने एनसीपी और एनसीपी (शरद पवार गुट) को करारी शिकस्त दी। अजित पवार ने अपने चाचा एनसीपी प्रमुख शरद पवार के गुट के साथ मिलकर गठबंधन बनाया था, लेकिन उनका ‘फैमिली रीयूनियन’ जुगाड़ काम नहीं आया और अपने गढ़ में ही फेल हो गए।
अजित पवार ने चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि पिछले नौ वर्षों में दोनों नगर निगमों में विकास ठप और भ्रष्टाचार फैला। उन्होंने एनसीपी (SP) के साथ हाथ मिलाकर भाजपा की चुनौती का सामना करने की कोशिश की, लेकिन नतीजे उनके पक्ष में नहीं गए। हालांकि, चुनावी रुझानों के अनुसार, पुणे में भाजपा 110 से अधिक सीटों पर आगे है, जबकि एनसीपी केवल 12 सीटों पर आगे और एनसीपी (SP) केवल 2 सीटों पर ही है। पिंपरी-चिंचवाड़ में भाजपा 84 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि एनसीपी केवल 37 सीटों पर।
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एनसीपी ने हार को किया स्वीकार
पुणे शहर एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप देशमुख ने कहा कि अजित पवार ने अभियान में पूरी मेहनत की और उन्होंने मुफ्त मेट्रो और बस सेवाओं, 500 वर्ग फीट तक के घरों पर प्रॉपर्टी टैक्स में छूट और बेहतर जल आपूर्ति जैसे वादे किए। हालांकि, हार स्वीकार करते हुए उन्होंने जनता के फैसले का सम्मान किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी ने इन वादों का मजाक उड़ाया, कहते हुए कि एनसीपी जानती थी कि जीत असंभव है। इन चुनावों के पीछे मुंधवा जमीन घोटाला की भी छाया रही, जिसमें अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम भी सामने आया था। 40 एकड़ सरकारी जमीन 1,800 करोड़ की कीमत में अमाडिया एंटरप्राइजेज LLP को केवल 300 करोड़ में बेची गई, जिसमें पार्थ भी पार्टनर हैं। जांच के बाद 21 करोड़ रुपये के स्टाम्प ड्यूटी माफ होने की जानकारी सामने आई और इस पर केस दर्ज किए गए।
ठाणे में भाजपा-शिवसेना गठबंधन का दबदबा
ठाणे नगर निगम के 131 सदस्यीय चुनाव में शिवसेना-भाजपा गठबंधन ने जीत की दिशा में मजबूत बढ़त बनाई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गढ़ में शिवसेना ने 33 और बीजेपी ने 17 सीटों पर बढ़त बनाई है। वहीं असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने अपने 15 प्रत्याशियों में से पांच सीटें जीती हैं। गठबंधन सहयोगी एनसीपी (अजित पवार) ने अब तक सात सीटें जीती हैं, जबकि एनसीपी (शरद पवार) आठ सीटों पर सिमटी है। उधव ठाकरे की शिवसेना (UBT) सिर्फ एक सीट जीत सकी और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का खाता तक नहीं खुल पाया। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP), वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) सहित अन्य दलों को भी सफलता नहीं मिली। कुल 174 में से केवल एक स्वतंत्र उम्मीदवार विजयी हुआ है। अब तक 72 परिणाम घोषित हुए हैं और 59 सीटों का फैसला अभी बाकी है।
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