महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रदेश में मुसलमानों को पांच फीसदी कोटा और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) पर बयान दिया है। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के खिलाफ एक प्रस्ताव विधानसभा में पारित करने पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि मैं शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेताओं की एक समिति बनाऊंगा जो एनपीआर के प्रावधानों को देखेगी।
ठाकरे ने कहा कि मुसलमानों के लिए पांच प्रतिशत कोटा का मुद्दा अब तक आधिकारिक रूप से मेरे पास नहीं आया है। हमने अभी इसपर कोई फैसला नहीं लिया है। विपक्ष को उस समय के लिए अपनी ऊर्जा बचाकर रखनी चाहिए जब हम वास्तव में इस मामले पर चर्चा करेंगे।
बता दें कि इससे पहले महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने रविवार को कहा था कि महाराष्ट्र विधानसभा नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के खिलाफ प्रस्ताव पारित नहीं करेगी। किसी को भी इससे डरने की जरुरत नहीं है।
अजित पवार ने पार्टी के मुंबई विंग के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, 'महाराष्ट्र के लोगों को सीएए, एनआरसी और एनपीआर से डरने की जरुरत नहीं है। कुछ लोग इसपर बहस करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन यदि केोई गलतफहमी पैदा करने की कोशिश करता है तो एनसीपी कार्यकर्ता उसे बता दें कि एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और महाविकास अघाड़ी के अन्य मंत्रियों ने कहा है कि राज्य में किसी की नागरिकता पर कोई आंच नहीं आएगी।'
उन्होंने कहा कि इन आश्वासनों के साथ विधानसभा में बिहार जैसा प्रस्ताव लाने की जरूरत नहीं है। पवार ने कहा, 'बिहार का फॉर्मूला यहां लागू करने की जरूरत नहीं है।'
वहीं, मुस्लिम आरक्षण पर पूर्व महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देंवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है। शिवसेना स्पष्ट करे कि क्या वह संविधान के खिलाफ जाकर इसे मंजूरी देगी।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कहा, मुस्लिमों को आरक्षण असांविधानिक है और इसका असर ओबीसी एवं मराठा आरक्षण पर होगा। शिवेसना को इस पर जवाब देना चाहिए। उसे बताना होगा कि शिवसेना ने सत्ता हासिल करने के लिए अपनी विचारधारा के साथ साथ और किस-किस चीज का समझौता किया है।