महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को विधान परिषद सदस्य मनोनीत करने के संबंध में सोमवार को दोबारा प्रस्ताव पारित किया गया है। इससे पहले नौ अप्रैल को उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय का प्रस्ताव पारित कर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के पास भेजा गया था।
सोमवार को पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे राज्य में कोरोना संकट का सामना कर रहे हैं। वहीं, कोरोना संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसी परिस्थिति में राज्य में की राजनीतिक अस्थिरता नहीं आनी चाहे। इसलिए राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विधान परिषद की रिक्त एक जगह के लिए उद्धव बालासाहेब ठाकरे को मनोनीत करने की सिफारिश की जाती है। साथ ही, राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से निवेदन किया गया है कि वह इस संबंध में शीघ्र कार्यवाही करें।
उद्धव ठाकरे फिलहाल विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। 28 नवंबर 2019 को शपथ ग्रहण के दौरान ही राज्यपाल कोश्यारी ने उन्हें छह महीने के अंदर विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य बनने के लिए कहा था। आगामी 27 मई को बतौर मुख्यमंत्री उनका छह महीने पूरे हो जाएंगा। ऐसे में 28 मई से पहले विधायक नहीं बनने पर उनके सामने सांविधानिक पेच खड़ा हो सकता है जिसके चलते उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की नौबत आ सकती है।
क्यों दोबारा पारित करना पड़ा प्रस्ताव
बीती नौ अप्रैल को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव पारित कर राज्यपाल के पास भेजा गया था कि उद्धव ठाकरे को विधान परिषद मनोनीत किया जाए। लेकिन राज्यपाल ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया। इस बीच मामला बांबे हाईकोर्ट में भी गया जहां दलील दी गई थी कि मंत्रिमंडल की बैठक मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होती है। जबकि नौ अप्रैल की बैठक उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की अध्यक्षता में हुई थी।
उपमुख्यमंत्री का पद संवैधानिक नहीं है। इसलिए नैतिक रूप से उपमुख्यमंत्री को राज्यमंत्रिमंडल की बैठक करने का अधिकार नहीं है। राज्य सरकार को भी पूर्व में पारित प्रस्ताव की वैधता को लेकर संदेह था। संभवतः इसलिए सोमवार को हुई बैठक में मुख्यमंत्री की तरफ से उपमुख्यमंत्री को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक बुलाने के लिए अधिकृत किया गया और फिर से प्रस्ताव पारित हुआ।