छगन भुजबल को पहले ही क्यों नहीं बनाया गया कैबिनेट का हिस्सा?
चंद्रकांत शिंदे के मुताबिक, छगन भुजबल के महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल से जुड़ने में देरी की बड़ी वजह अजित पवार से उनका मनमुटाव रहा।
बीच में अटकलें थीं कि छगन भुजबल आगे देवेंद्र फडणवीस के साथ जा सकते हैं। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं। देवेंद्र फडणवीस की तरफ से उन्हें समझाए जाने की चर्चाएं भी सामने आईं।
बीते दिनों में छगन भुजबल की जो अजित पवार से दूरियां कम हुई हैं, उसकी असल वजह देवेंद्र फडणवीस हैं। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से देवेंद्र फडणवीस, अजित पवार और छगन भुजबल के बीच बातें हो रही थीं।
शिंदे के मुताबिक, छगन का चेहरा महायुति में बाकी साथी पार्टियों (भाजपा-शिवसेना) में स्वीकृत भी है। ऐसे में वह महायुति को काफी फायदा पहुंचा सकते हैं।
क्या शरद पवार फैक्टर के डर से तो कैबिनेट में शामिल नहीं किए गए भुजबल?
"अजित पवार ने जब शरद पवार का साथ छोड़ा, तब छगन भुजबल ने काफी बयानबाजी की थी। ऐसे में उनका शरद पवार के साथ जाना काफी मुश्किल था। इसकी भी संभावना नहीं थी कि शरद पवार के कोई साथी छगन भुजबल के साथ जुड़ जाते।"
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