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महाराष्ट्र बजट सत्र 23 फरवरी से: अजीत पवार के निधन, कर्ज का बोझ और राज्यसभा चुनाव; इन मुद्दों पर होगी तकरार

Fri, 20 Feb 2026 01:53 PM IST
नवीन पारमुवाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू हो रहा है। इस सत्र में सरकार पर 9 लाख करोड़ के कर्ज, राज्यसभा चुनाव और अजित पवार के निधन के बाद बने राजनीतिक हालातों पर चर्चा हो सकती है। 
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देवेंद्र फडणवीस, सीएम, महाराष्ट्र - फोटो : ANI
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विस्तार
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Maharashtra Budget Session: महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू हो रहा है। इस बार सत्र में राज्य के बढ़ते कर्ज, राज्यसभा चुनाव और अजित पवार के निधन के बाद बने राजनीतिक हालातों पर बहस छिड़ सकती है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 6 मार्च को 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश करेंगे। उनके पास वित्त मंत्रालय का भी जिम्मा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सत्र सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।
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सरकार के सामने कर्ज और विकास की चुनौती
फडणवीस सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य के बढ़ते कर्ज को संभालते हुए विकास की गति बनाए रखना है। राज्य पर 9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज होने का अनुमान है। सरकार ने महाराष्ट्र को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में विकास योजनाओं पर खर्च और वित्तीय घाटे के बीच संतुलन साधना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

इन योजनाओं पर रहेगा सरकार का जोर
बजट में कई बड़ी परियोजनाओं के लिए घोषणाएं हो सकती हैं। इनमें पुणे-नाशिक हाई-स्पीड रेल, मेट्रो नेटवर्क का विस्तार, पालघर में वढवाण बंदरगाह का विकास और मुंबई वाटर मेट्रो प्रोजेक्ट शामिल हैं। माना जा रहा है कि सरकार अपनी 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' जैसी लोकप्रिय योजनाओं को भी जारी रखेगी। इस योजना में महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जाते हैं।
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मराठवाड़ा और विदर्भ जैसे इलाकों में मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए सरकार 'जलवायु-अनुकूल खेती' के लिए एक विशेष पैकेज का ऐलान भी कर सकती है। इन क्षेत्रों में बेमौसम बारिश, बाढ़ और लू जैसी समस्याएं किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

विपक्ष की घेराबंदी की तैयारी
विपक्ष ने भी सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर रखी है। विपक्षी दल औद्योगिक निवेश और असल में पैदा हुए रोजगार के बीच के अंतर पर सरकार को घेरने की योजना बना रहे हैं। साथ ही, वे सरकार पर चुनावी खर्च करने और लंबी अवधि की वित्तीय समझदारी को नजरअंदाज को लेकर निशाना साध सकते हैं। अजित पवार की मौत का मुद्दा भी सत्र में प्रमुखता से उठने की संभावना है। एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने 28 जनवरी को हुए विमान हादसे की पारदर्शी जांच की मांग की है। वहीं, पार्टी के कुछ नेता इसकी सीबीआई जांच चाहते हैं।

राज्यसभा चुनाव का गणित
यह सत्र उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के लिए भी अहम होगा। वे पहली बार विधायी कार्यवाही में शामिल होंगी। फिलहाल वे किसी भी सदन की सदस्य नहीं हैं और बारामती से उपचुनाव लड़ सकती हैं। यह दूसरा ऐसा सत्र होगा जब विधानसभा और विधान परिषद, दोनों में कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं है।

सत्र के दौरान ही राज्यसभा की 7 सीटों के लिए चुनाव भी होने हैं। एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले का कार्यकाल खत्म हो रहा है। मौजूदा संख्या बल के हिसाब से विपक्ष केवल एक ही सदस्य राज्यसभा भेज सकता है। इस एक सीट को लेकर शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के बीच खींचतान चल रही है।

महाराष्ट्र की 288 सदस्यों वाली विधानसभा में महायुति के पास 232 विधायक हैं। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के 20, कांग्रेस के 16 और एनसीपी-एसपी के 10 विधायक हैं। दो सीटें खाली हैं। राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 36 वोटों की जरूरत होगी। अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी-एसपी के 10 विधायकों का रुख अभी साफ नहीं है।
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