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महाराष्ट्र में बलात्कार और हत्या के दोषियों को नहीं मिलेगी पैरोल

Thu, 01 Sep 2016 05:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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- फोटो : demo
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महाराष्ट्र में बलात्कार और हत्या के दोषियों को पैरोल नहीं मिलेगी। इसके साथ ही जो लोग बाल तस्करी जैसे गंभीर अपराधों के दोषी हैं उन्हें भी पैरोल नहीं दी जाएगी। राज्य सरकार ने मुंबई की वकील व राष्ट्रीय स्तर की तैराक पल्लवी पुरकायस्थ के  हत्यारे सज्जाद मुगल के फरार हो जाने के बाद पैरोल के नियमों में यह अहम बदलाव किया है।
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गृह विभाग ने पिछले सप्ताह ही सभी कैदियों के पैरोल आवेदनों को अस्थायी रूप से रोक लगा दिया था। कहा गया था कि जब तक पैरोल के संशोधित नियमों की अधिसूचना जारी नहीं की जाती, तब तक किसी को कोई पैरोल नहीं दी जाएगी। मुंबई की वकील 25 वर्षीय पल्लवी पुरकायस्थ की साल 2012 में अपार्टमेंट के ही गार्ड सज्जाद अहमद मुगल ने बलात्कार की कोशिश की थी और इसमें असफल रहने के बाद उसकी हत्या कर दी थी। पल्लवी की हत्या के मामले में सज्जाद को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने 434 पन्ने का आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया था। 

साल 2014 में सत्र न्यायालय ने सज्जाद को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुर्नाई थी। नासिक जेल में सजा काट रहे सज्जाद ने बीते मार्च में मां की बीमारी के बहाने पैरोल के  लिए आवेदन किया था जिसे मंजूर कर लिया गया था। लेकिन, पैरोल पर रिहा होने के बाद वह लापता हो गया। हालांकि पुलिस जम्मू-कश्मीर स्थित उसके गांव भी गई थी। लेकिन, उसका पता नहीं चला।
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सज्जाद मुगल को पैरोल पर रिहा करने में हुई नियमों की अनदेखी

- फोटो : demo
सज्जाद मुगल के फरार होने के बाद उपमहानिरीक्षक (कारागार) राजेंद्र धामने की अध्यक्षता में जांच टीम बनाई गई। धामने की रिपोर्ट के आधार पर सज्जाद को पैरोल पर रिहा करने वाले तत्कालीन कारागार अधीक्षक जेएस नाईक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। नाईक को कुछ सप्ताह पहले ही अमरावती जेल का दायित्व सौंपा गया था। राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कारागार) बीके उपाध्याय ने नाईक के निलंबन की पुष्टि की है। 

उपाध्याय ने बताया कि सज्जाद मुगल को पैरोल पर रिहा करके नाईक ने नियमों की अनदेखी की है। जेल नियमावली के मुताबिक इस प्रकार के आरोपों का सामना करने वालों को छुट्टी देने का प्रावधान नहीं है। गृह विभाग के सूत्रों के मुताबिक नाईक पहले भी दो ऐसे कैदियों कोे रिहा कर चुके हैं जिन्हें आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी पाया गया था। इस मामले में उनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। इसको देखते हुए राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन कर संगीन अपराधियों के पैरोल पर रोक लगाने का फैसला किया है।
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