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Maharashtra Election Result 2024: महाराष्ट्र में कैसे बदल गया खेल? भाजपा ने मारी बाजी और देखती रह गई कांग्रेस

सार

Maharashtra Election Result 2024: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे से एक तरफ जहां महायुति में जश्न का माहौल है, वहीं महा विकास अघाड़ी के घटक दलों में गम का माहौल है। चुनावी नतीजों के बाद तमाम सवाल उठ रहे हैं कि आखिर राज्य में कैसे चुनावी खेल बदल गया और भाजपा ने बाजी मार ली। जबकि एमवीए के दल सिर्फ देखते रह गए।

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महाराष्ट्र में कैसे बदल गया खेल? - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हर हार के बाद भाजपा के नेता सबक लेते हैं। हर जीत के बाद विपक्ष के गुब्बारे फूल जाते हैं। संघ के नेता ज्ञानेश्वर कहते हैं कि आप इसी चश्मे से महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव नतीजे को देख लीजिए। उत्तर प्रदेश में भी देखिए, जहां नौ में से सात सीट भाजपा की झोली में आ रही है। ज्ञानेश्वर का कहना है कि लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा ने बहुत कुछ सीखा, लेकिन विपक्ष के नेता लग रहा है आश्वस्त हो गए। चुनाव के नीतजों पर राहुल गांधी की भी प्रतिक्रिया आई है।

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महाराष्ट्र के नतीजे अप्रत्याशित- राहुल गांधी
राहुल गांधी ने कहा कि झारखंड में जनता ने विशाल जनादेश दिया है। महाराष्ट्र के नतीजे अप्रत्याशित हैं। महाराष्ट्र के नतीजे पर हम विस्तार से विश्लेषण करेंगे। राहुल गांधी राजनीति में शरद पवार का बहुत सम्मान करते हैं। विधानसभा चुनाव में शरद पवार ने अपने राजनीतिक जीवन का अब तक का सबसे बड़ा खराब हश्र देख लिया। जबकि 4 जुलाई 2024 को लोकसभा चुनाव के नतीजे ने महा विकास अघाड़ी के चेहर पर बुलंद मुस्कान छेड़ दी थी। बड़ा सवाल है कि आखिर अगले चार महीने में ऐसा क्या बदल गया?

  • महाराष्ट्र में मिलकर लड़ी महायुति और टकराते रहे अघाड़ी के नेता
  • लाड़ला भाई और लाड़ला बहना योजना ने किया कमाल
  • राहुल गांधी के संविधान बचाने के अभियान का क्या होगा?


महाराष्ट्र में कैसे बदल गया खेल?
महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव) के नेता संजय राउत तो चुनाव नतीजे पर ही सवाल उठा रहे हैं, अर्जुन यादव का नजरिया थोड़ा अलग है। अर्जुन यादव का कहना है कि भाजपा के नेताओं ने चुनाव जीतने के लिए रणनीति बनाकर काम किया। देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (शिंदे) एकनाथ शिंदे और एनसीपी (अजित) के अजित पवार ने आपसी तालमेल को बेहतर बनाया। भितर घात को कम किया। हारने वाली सीट पर विरोधी को घेरने, वोट बंटवारे की रणनीति बनाई और जीतने वाली सीट पर भी लगातार सक्रिय रहे। अर्जुन के मुताबिक उनके दल (शिवसेना, उद्धव) के साथ एनसीपी (शरद), कांग्रेस का राजनीतिक तालमेल उतना अच्छा नहीं था। अर्जुन मुंबई में काफी सक्रिय रहते हैं। उत्तर भारतीयों के स्थानीय नेता भी हैं। कहते हैं कि उत्तर भारतीयों को भी अपने पाले में भुनाने में लग रहा है कि भाजपा अधिक सफल रही। इसका लाभ उसके सहयोगी दलों को भी मिला। इस बारे में श्रीकांत निगवेकर कहते हैं कि अपने गठबंधन का सबसे बड़ा भाजपा थी। यह पहले से साफ था कि 288 में से 150 के आस-पास सीटों पर भाजपा उम्मीदवार उतारेगी। शिवसेना (शिंदे) दूसरे सहयोगी एनसीपी (अजित) से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी। लेकिन यह मोटी-मोटी बात शिवसेना (उद्धव), एनसीपी (शरद) और कांग्रेस में काफी उलझाऊ थी। इसे सुलझाने में विपक्ष की चुनाव तैयारी समय से पिछड़ गई।  

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क्या लाड़ला भाई औल लाड़ला बहना ने किया कमाल?
श्यामकांत जागीरदार महाराष्ट्र से आते हैं। वह कहते हैं कि लाड़ला भाई और लाडला बहना योजना ने गेम चेंजर का काम किया है। श्यामकांत वरिष्ठ पत्रकार हैं। निजी बातचीत में कहते हैं कि लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा संभल गई थी। उसने महाराष्ट्र में मध्य प्रदेश की लाड़ली योजना से सबक लेते हुए लाड़ला भाई औल लाडला बहना योजना को अपनाया। इसकी किस्त भी हर महिला और युवा के खाते में आ गई। श्यामकांत कहते हैं कि उ.प्र. 2022 के विधानसभा चुनाव में 5 किलो फ्री राशन, दिल्ली विधानसभा चुनाव में फ्री बिजली, फ्री पानी ने कमाल किया था। मध्य प्रदेश का उदाहरण सामने है। इतना ही नहीं किसान सम्मान निधि ने भी असर दिखाया था। इसलिए महाराष्ट्र में महायुति ने सामाजिक, राजनीतिक समीकरण को ढंग से साधा। कई कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों का उद्घाटन किया।

पूछिए कि कांग्रेस, एनसीपी (शरद), शिवसेना (उद्धव) ने क्या किया?
कल्याण पाटील के पास एक गंभीर सवाल है? उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष ने चुनाव लड़ने की तैयारी की, लेकिन महाविकास अघाड़ी के तीनों घटक दलों ने क्या किया? अजीत कहते हैं कि केवल राहुल गांधी के संविधान बचाने को मुद्दा बनाने से तो चीजें नहीं बदल जाएगी? पृथ्वीराज चौह्वाण तो मुख्यमंत्री थे, चुनाव हार गए। बाला साहब थोराट की स्थिति देख लीजिए। नाना पटोले हारते-हारते बचे।कल्याण के मुताबिक विपक्ष को मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा के चुनाव से थोड़ा सबक ले लेना चाहिए था। कल्याण पाटील कहते हैं कि बाजपा दो रणनीति पर काम करती है। वह विरोधी दल को कमजोर करने के लिए उसके नेताओं को तोड़ती है और जीतने के लिए पूरे मन से चुनाव प्रचार करती है। जबकि विपक्ष अपने ही नेताओं को नहीं बचा पाता। वह एन वक्त पर साथ छोड़कर चले जाते हैं। नासिक मिलन रवानी एक अच्छे कारोबारी हैं। वह कहते हैं कि भाजपा के नेता जीतने के लिए माहौल बनाते हैं, जबकि विपक्ष में इसका उत्साह कम दिखाई देता है। आपसी लड़ाई ज्यादा दिखाई देती है।
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