Maharashtra Election Result 2024: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे से एक तरफ जहां महायुति में जश्न का माहौल है, वहीं महा विकास अघाड़ी के घटक दलों में गम का माहौल है। चुनावी नतीजों के बाद तमाम सवाल उठ रहे हैं कि आखिर राज्य में कैसे चुनावी खेल बदल गया और भाजपा ने बाजी मार ली। जबकि एमवीए के दल सिर्फ देखते रह गए।
हर हार के बाद भाजपा के नेता सबक लेते हैं। हर जीत के बाद विपक्ष के गुब्बारे फूल जाते हैं। संघ के नेता ज्ञानेश्वर कहते हैं कि आप इसी चश्मे से महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव नतीजे को देख लीजिए। उत्तर प्रदेश में भी देखिए, जहां नौ में से सात सीट भाजपा की झोली में आ रही है। ज्ञानेश्वर का कहना है कि लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा ने बहुत कुछ सीखा, लेकिन विपक्ष के नेता लग रहा है आश्वस्त हो गए। चुनाव के नीतजों पर राहुल गांधी की भी प्रतिक्रिया आई है।
महाराष्ट्र में कैसे बदल गया खेल?
महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव) के नेता संजय राउत तो चुनाव नतीजे पर ही सवाल उठा रहे हैं, अर्जुन यादव का नजरिया थोड़ा अलग है। अर्जुन यादव का कहना है कि भाजपा के नेताओं ने चुनाव जीतने के लिए रणनीति बनाकर काम किया। देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (शिंदे) एकनाथ शिंदे और एनसीपी (अजित) के अजित पवार ने आपसी तालमेल को बेहतर बनाया। भितर घात को कम किया। हारने वाली सीट पर विरोधी को घेरने, वोट बंटवारे की रणनीति बनाई और जीतने वाली सीट पर भी लगातार सक्रिय रहे। अर्जुन के मुताबिक उनके दल (शिवसेना, उद्धव) के साथ एनसीपी (शरद), कांग्रेस का राजनीतिक तालमेल उतना अच्छा नहीं था। अर्जुन मुंबई में काफी सक्रिय रहते हैं। उत्तर भारतीयों के स्थानीय नेता भी हैं। कहते हैं कि उत्तर भारतीयों को भी अपने पाले में भुनाने में लग रहा है कि भाजपा अधिक सफल रही। इसका लाभ उसके सहयोगी दलों को भी मिला। इस बारे में श्रीकांत निगवेकर कहते हैं कि अपने गठबंधन का सबसे बड़ा भाजपा थी। यह पहले से साफ था कि 288 में से 150 के आस-पास सीटों पर भाजपा उम्मीदवार उतारेगी। शिवसेना (शिंदे) दूसरे सहयोगी एनसीपी (अजित) से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी। लेकिन यह मोटी-मोटी बात शिवसेना (उद्धव), एनसीपी (शरद) और कांग्रेस में काफी उलझाऊ थी। इसे सुलझाने में विपक्ष की चुनाव तैयारी समय से पिछड़ गई।