महाराष्ट्र विधानसधा चुनाव नजदीक हैं। चुनाव को लेकर कांग्रेस, एनसीपी और सहयोगी दलों के बीच सीटों का बंटवारा हो गया है। महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीट हैं जिनमें से 125-125 पर कांग्रेस और एनसीपी चुनाव लड़ेंगी। 38 विधानसभा सीट सहयोगी दलों की दी गई हैं। हालांकि, बहुजन वंचित अघाड़ी पार्टी से समझौता नहीं हो पाया है।
दोनों दलों ने 2014 में राज्य विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़े थे। तब कांग्रेस और राकांपा के बीच सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई थी जिसके बाद पवार की पार्टी ने 15 साल पुराने गठबंधन को तोड़ लिया था। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 42 तो राकांपा ने 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2014 के इन चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी भाजपा को 122 सीटें मिली थीं।
राकांपा के वरिष्ठ नेता शरद पवार को सोमवार को तब एक और झटका लगा, जब उनकी पार्टी के जानेमाने नेता भास्कर जाधव ने शिवसेना में शामिल होने की घोषणा की। जाधव का महाराष्ट्र के कोंकण इलाके में तगड़ा जनाधार माना जाता है। जाधव ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत शिवसेना से ही की, मगर साल 2000 में एनसीपी में आ गए। उन्हें कांग्रेस-एनसीपी की तत्कालीन राज्य सरकार में मंत्री पद मिला था।
जाधव ने रत्नागिरी में समर्थकों के साथ सोमवार को बैठक के बाद शिवसेना में शामिल होने की घोषणा की। उन्होंने पिछले दिनों शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। राज्य में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए राकांपा और कांग्रेस के दिग्गज नेता पार्टी छोड़ कर भाजपा-शिवसेना में शामिल हो रहे हैं।
भाजपा और शिवसेना के बीच सीट बंटवारे पर बात नहीं बन पा रही है। सूत्रों का कहना है कि दोनों दल भले दावा कर रहे हैं कि मिलकर लड़ेंगे, मगर भाजपा ने अपने नेताओं को पहले ही अकेले तैयारी के संकेत दे दिए थे। अब शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी रविवार और सोमवार को मातोश्री में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की और अकेले लड़ने के लिए तैयार रहने पर चर्चा की हैं।
दरअसल, भाजपा बंटवारे में शिवसेना को आधी सीटें (144) देने को तैयार नहीं है। भाजपा की तरफ से केवल 106 सीटों के प्रस्ताव है। भाजपा ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगे भी देवेंद्र फडणवीस ही मुख्यमंत्री रहेंगे। जबकि शिवसेना आदित्य ठाकरे को महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में फडणवीस के मुकाबले दिखाने की कोशिश कर रही है। वहीं, भाजपा का अंदरूनी सर्वे विधानसभा चुनाव में उसे 2014 से ज्यादा सीटें दिखा रहा है। इससे भाजपा को अकेले लड़ने में कोई नुकसान नहीं है।