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Maharashtra: शरद पवार का छगन भुजबल पर हमला, कहा- मैंने उनकी कमजोरियों को नजरअंदाज किया, उन्होंने धोखा दिया

Tue, 12 Nov 2024 10:26 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

Maharashtra Vidhan Sabha Chunav 2024: छगन भुजबल शरद पवार के काफी करीबी और विश्वासपात्र रहे हैं। महाराष्ट्र में जब एनसीपी का बंटवारा हुआ तो छगन भुजबल अजित पवार के साथ चले गए थे।
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024: छगन भुजबल और शरद पवार। - फोटो : ANI
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विस्तार
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महाराष्ट्र चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। मंगलवार को एनसीपी शरद के प्रमुख शरद पवार ने छगन भुजबल पर हमला बोला। उन्होंने छगन भुजबल के निर्वाचन क्षेत्र येवला में एक जनसभा के दौरान कहा कि छगन भुजबल विश्वासघाती हैं। मैंने उनकी कमजोरियों को नजरअंदाज करके विपक्षी नेता से लेकर उपमुख्यमंत्री तक बनाया। मगर उन्होंने राजनीतिक शालीनता की सभी हदों को पार करते हुए मुझे धोखा दिया। 
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दरअसल छगन भुजबल शरद पवार के काफी करीबी और विश्वासपात्र रहे हैं। महाराष्ट्र में जब एनसीपी का बंटवारा हुआ तो छगन भुजबल अजित पवार के साथ चले गए। इसे लेकर शरद पवार ने रैली में कहा कि 2019 में येवला को गलत उम्मीदवार देने के लिए मैं माफी मांगता हूं। उन्होंने मतदाताओं से विश्वासघाती को हराने की अपील की।

शरद पवार ने कहा कि भुजबल की छवि अपने गुरुओं (शरद पवार और बाल साहेब ठाकरे) को धोखा देने की है। इस दलबदलू नेता को चुनाव को सबक सिखाने की जरूरत है। जिन बाला साहेब ठाकरे ने भुजबल को मुंबई का मेयर बनाया, उन्होंने ही बालासाहेब ठाकरे का मजाक उड़ाया। जब उन्हें शिवसैनिकों के हमलों का डर था, तो मैंने उनको बचाया। जब छगन भुजबल ने चुनाव लड़ने की इच्छा जताई, तो हमने उन्हें उम्मीदवार बनाया, लेकिन वे हार गए।
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एनसीपी शरद के प्रमुख पवार ने कहा कि जब भुजबल विधानसभा चुनाव हार गए, तो हमने उन्हें विधान परिषद में भेजा और विपक्ष का नेता भी बनाया। जब मैंने एनसीपी की स्थापना की थी, तो मैनें भुजबल को पार्टी का पहला राज्य अध्यक्ष बनाया था। मैंने उन्हें येवला से मैदान में उतारकर और सरकार में दूसरा महत्वपूर्ण मंत्री बनाकर गलती की। इसके बाद उन्होंने कहा कि भुजबल ने कुछ गलतियां की थीं और उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था, लेकिन खुद को सुधारने का आश्वासन दिया तो मैंने उनको सरकार में वापस लिया था। 

जब जेल गए तो मैं साथ खड़ा था: पवार
शरद पवार यहां तक बोले कि जब छगन भुजबल कुछ आरोप लगने के बाद जेल गए तो मैं उनके साथ खड़ा रहा और यहां तक कि उन्हें महाविकास अघाड़ी सरकार में पद भी दिया। मगर जब एनसीपी में विभाजन हुआ था, तब भुजबल मेरे पास आए और अजित पवार से मध्यस्थता की पेशकश की। इसके बाद वह चले गए और वापस नहीं आए। इसके अगले दिन उन्होंने मंत्री पद की शपथ ले ली। ऐसे धोखा देने वाले भुजबल अब येवला के लोगों से वोट मांगने आएंगे। यह आपको तय करना है कि ऐसे व्यक्ति का समर्थन करना है या नहीं।
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