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Maharashtra Ground Report: विदर्भ में गढ़ बचाने की लड़ाई, 62 में 36 सीटों पर कांग्रेस-भाजपा में सीधा मुकाबला

Fri, 15 Nov 2024 10:58 AM IST
शिव शुक्ला सुरेन्द्र मिश्र

सार

भाजपा 2014 जैसी कामयाबी के लिए बंटेंगे तो कटेंगे, एक रहोगे तो सुरक्षित रहोगे के नारे पर टिकी है। वहीं, कांग्रेस और महाविकास आघाड़ी संविधान बचाओ के नारे और जातिगत समीकरणों के सहारे चुनावी रण में उतरी है।
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में विदर्भ पर राजनीतिक दलों का जोर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महाराष्ट्र के विदर्भ में विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (एमवीए) लोकसभा चुनाव के नतीजे दोहराने की फिराक में है। वहीं, सत्तारूढ गठबंधन महायुति विशेष तौर से भाजपा, 2014 जैसी सफलता पाने के लिए संघर्षरत है। विदर्भ की 62 सीटों पर कांटे की लड़ाई है, जहां आघाड़ी लोकसभा चुनाव की तर्ज पर विधानसभा चुनाव में भी संविधान बचाओ के नारे और जातिगत समीकरण के सहारे है। वहीं, भाजपा के सामने विदर्भ का गढ़ बचाने की चुनौती है। इसलिए भाजपा ने बंटेंगे तो कटेंगे और एक रहोगे तो सुरक्षित रहोगे का नारा दिया है। कांग्रेस इन्हीं नारों की काट में उलझी है।
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288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में 20 नवंबर को होने वाले मतदान से पहले चुनाव प्रचार अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। दो धुर विरोधी विचारधारा की पार्टी कांग्रेस और भाजपा विदर्भ पर कब्जे के लिए संघर्ष कर रही है। लोकसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा अब एकजुटता का राजनीतिक संदेश दे रही है, क्योंकि इस बार वोटकटवा का लाभ मिलने की गुंजाइश नहीं दिख रही है। इसके अलावा, लाडकी बहना जैसी लोकलुभावन योजनाओं के जरिए भी जनता को अपने पाले में लाने की कोशिश है। वहीं, कांग्रेस को भरोसा है कि विदर्भ उनका गढ़ रहा है, इसलिए लोकसभा चुनाव की पुनरावृत्ति विधानसभा में भी होगी। भले ही संविधान बचाओ का नारा विधानसभा चुनाव में प्रभावी नहीं हो पा रहा है, लेकिन जातीय समीकरण उसके पक्ष में है। उसने सोयाबीन और कच्चे कपास के उचित मूल्य को भी मुद्दा बनाया है, लेकिन, कांग्रेस की दिक्कत यह है कि सीट बंटवारे में विदर्भ में वह 40 से अधिक सीटें हासिल नहीं कर पाई है।

भाजपा नेता अजय पाठक कहते हैं कि पिछले चुनाव से इस बार काफी कुछ बदल गया है। विदर्भ में भाजपा 2014 में जीती गई 44 सीटों की बराबरी करेगी। कांग्रेस नेता व नागपुर उत्तर से उम्मीदवार नितिन राउत कहते हैं कि कृषि उपज के अलावा महंगाई और बढ़ती बेरोजगारी भी एमवीए का चुनावी मुद्दा है। विदर्भ में एमवीए बेहतर प्रदर्शन करेगी। साल 2014 में मोदी लहर में विदर्भ से ही पहली बार महाराष्ट्र में भाजपा की सत्ता का द्वार खुला था। इस बार भी यही माना जा रहा है कि मुंबई की ओर जाने वाला सत्ता का गलियारा विदर्भ से होकर गुजरेगा। इसलिए दोनो ही गठबंधन ने विदर्भ में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

 

कांटे की लड़ाई...62 में से 36 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में सीधा मुकाबला
महाराष्ट्र के चुनावी रण में तीन-तीन राजनीतिक दलों का समूह भाजपानीत महायुति और कांग्रेसनीत एमवीए के रूप में एक-दूसरे के सामने मैदान में हैं। विदर्भ के 11 जिलों की बात करें, तो यहां महायुति की भाजपा और एमवीए के मुख्य दल कांग्रेस के बीच ही चुनावी टक्कर है। यहां की 62 विधानसभा क्षेत्रों में 36 सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है।

 शिवसेना (उद्धव गुट) बनाम शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच छह सीटों पर और एनसीपी (शरद गुट) बनाम एनसीपी (अजीत गुट) के बीच सात सीटों पर सीधी लड़ाई है। हालांकि एनसीपी (अजीत गुट) में तीन उम्मीदवार भाजपा से आयातित हैं।

 भाजपा के कुछ प्रमुख नेता विदर्भ से चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर दक्षिण-पश्चिम, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले कामठी, सुधीर मुनगंटीवार चंद्रपुर जिले के बल्लारशाह से और मदन येरावर यवतमाल से चुनाव लड़ रहे हैं।
 कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले साकोली (भंडारा) व विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार चंद्रपुर के ब्रह्मपुरी से मैदान में हैं।

 
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विदर्भ में 2019 में भाजपा को मिली थीं 29 सीटें
जिला  क्षेत्र  भाजपा  कांग्रेस एनसीपी शिवसेना अन्य
नागपुर 12 06 04 01 00 01
अकोला 05 04 00 00 01 00
अमरावती 08 01 03 00 01 00
भंडारा 03 00 03 00 00 00
गोंदिया 04 01 01 01 00 01
बुलढाणा 07 03 01 01 02 00
चंद्रपुर 06 02 03 00 00 01
गढ़चिरौली 03 02 00 01 00 00
वर्धा 04 03 01 00 00 00
यवतमाल 07 05 00 01 01 00
वाशिम 03 02 01 00 00 00

(भाजपा-29, कांग्रेस-15, शिवसेना-03, एनसीपी (एसपी)-01 शिवसेना (यूबीटी)-01 और अन्य 08)
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