सोमवार को महाराष्ट्र विधानसभा में हंगामा करने और पीठासीन अध्यक्ष भाष्कर जाधव के साथ अभद्रता करने के आरोप में भाजपा के 12 सदस्यों को निलंबित कर दिया गया। आखिरकार, 12 लोग ही क्यों निलंबित किए गए। इस निलंबन का राज क्या है। इसको लेकर सूबे में सियासी चर्चा शुरू हो गई है कि क्या महा विकास आघाड़ी सरकार के दांव से भाजपा चित हो गई है।
राजनीति के जानकार इसे विधान परिषद के 12 सदस्यों के मनोनयन में हो रही देरी से भी जोड़कर देख रहे हैं। दरअसल, सूबे में राज्यपाल को कला, संस्कृति, सामाजिक और साहित्य जगत से संबंधित 12 लोगों को विधान परिषद सदस्य मनोनीत करने का अधिकार है।
इस संबंध में राज्य मंत्रिमंडल ने एक प्रस्ताव पारित कर 5 नवंबर, 2020 को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के पास भेजा था। हालांकि, राज्यपाल ने इस प्रस्ताव को अभी तक मंजूरी नहीं दी है। इस बीच विधान परिषद सदस्यों के मनोनयन को लेकर सुप्रीम कोर्ट मे एक जनहित याचिका भी दायर हुई, लेकिन, अदालत ने यह कहकर याचिका खारिज कर दी कि राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करते हैं। ऐसे में अदालतें उनके लिए दिशा-निर्देश नहीं बना सकती कि वह कैसे काम करेंगे।
भाजपा-शिवसेना की दोस्ती शुरू होने से पहले पड़ी दरार
दो दिन पहले तक भाजपा-शिवसेना के एक साथ आने की अटकलें शुरू थीं। विपक्ष के नेता फडणवीस ने शिवसेना को शत्रु मानने से इनकार किया था तो शिवसेना के संजय राऊत ने भी आमिर खान और किरण राव की तरह दोस्ती बरकरार रहने की बात कही थी। लेकिन दोपहर होते-होते इस दोस्ती में फिर दरार पड़ गई।
दरअसल, विधानसभा में हंगामे से लेकर विधायकों के निलंबन की कार्रवाई में कांग्रेस-एनसीपी की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं रही। सदन में हंगामा भाजपा के विधायकों ने किया और जिस पीठासीन अध्यक्ष के साथ अभद्रता के आरोप में 12 सदस्य निलंबित हुए वह पीठासीन अध्यक्ष शिवसेना के भास्कर जाधव थे।