एंटीलिया मामले के बाद महाराष्ट्र की सियासत गरमाती जा रही है। मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह की चिट्ठी से महाराष्ट्र में शुरू हुआ सियासी संकट सुलझने के बजाय और उलझता ही जा रहा है। परमबीर सिंह के बाद अब गृहमंत्री अनिल देशमुख ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर अपने ऊपर लगे आरोपों की जांच कराने की बात कही है।
बता दें कि इससे पहले मंगलवार को पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख की मुश्किलें और बढ़ा दी थीं। उन्होंने आईपीएस रश्मि शुक्ला के पत्र का जिक्र करते हुए महाराष्ट्र में ट्रांसफर-पोस्टिंग रैकेट चलने व बड़े नेताओं व अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया।
सीआरपीएफ में सहायक महानिदेशक हैं रश्मि शुक्ला
फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला का जिक्र किया वह अभी सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) में सहायक महानिदेशक हैं। इससे पहले वह महाराष्ट्र के इंटेलिजेंस विभाग में आयुक्त रह चुकी हैं। महाराष्ट्र की सियासत में उबाल का सबब बने परमबीर सिंह व रश्मि शुक्ला दोनों 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। रश्मि शुक्ला ने पिछले साल लिखे पत्र में पुलिस के कुछ बड़े अफसरों और अन्य अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के रैकेट में शामिल होने का दावा किया था। पत्र के साथ सबूत के तौर पर रश्मि शुक्ला ने फोन रिकॉर्डिंग होने का भी दावा किया था।
25 अगस्त 2020 को लिखे पत्र में यह लिखा-
रश्मि शुक्ला ने यह चिट्ठी पिछले साल 25 अगस्त को लिखी थी। इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र के पुलिस विभाग में अफसरों की पोस्टिंग और ट्रांसफर रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। इसके तार राज्य के कुछ नेताओं से जुड़े हैं। शुक्ला ने पत्र में लिखा कि मामले से जुड़े लोगों के फोन कॉल ट्रेस किए गए। इसमें रैकेट की बात सच साबित हुई। इससे कुछ दलाल व ताकतवर लोग जुड़े थे। आईपीएस अधिकारी भी इन अवांछित लोगों के संपर्क में थे।
लिफाफे में फोन रिकॉर्डिंग्स की ट्रांसक्रिप्ट भी
आईपीएस रश्मि शुक्ला ने अपनी चिट्ठी में 2017 के भी एक मामले का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि तब मुंबई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया था। इसकी विस्तृत रिपोर्ट में फोन रिकॉर्डिंग्स की ट्रांसक्रिप्ट भी है। शुक्ला ने पत्र में लिखा कि इस पूरे मामले को तुरंत मुख्यमंत्री की जानकारी में लाया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट से परमबीर सिंह को झटका
वहीं दूसरी तरफ मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि वे बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी याचिका दायर करें।
बता दें कि जब परमबीर सिंह को मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटाया गया, तो उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गृह मंत्री अनिल देशमुख पर धन उगाही का आरोप लगा दिया। इस पत्र ने महाराष्ट्र की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। परमबीर सिंह ने कहा चिट्टी में कहा कि अनिल देशमुख ने सचिन वाजे को कई बार घर पर मिलने के लिए बुलाया था। गृह मंत्री ने वाजे को फंड का जुगाड़ करने के लिए कहा था। इतना ही नहीं वाजे को हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली का भी लक्ष्य दिया था। गृह मंत्री ने वाजे को बताया था कि मुंबई में लगभग 1,750 बार, रेस्तरां और अन्य प्रतिष्ठान हैं। प्रत्येक से हर महीने 2-3 लाख अगर लिए जाएं तो 40-50 करोड़ का जुगाड़ हो जाएगा। गृह मंत्री ने कहा था कि बाकी बची रकम अन्य स्रोतों से बनाया जा सकता है।