एनसीपी विधायक दल के नेता अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के साथ 36 का आंकड़ा दिखा खुद को अलग किया है लेकिन आने वाले समय में उनकी राजनीति की नई पारी के लिए 36 का अंक महत्व रखता है।
दरअसल महाराष्ट्र में एनसीपी के विधायकों का समर्थन दिखाकर भाजपा ने सरकार तो बना ली है लेकिन सरकार में शामिल होने आए विधायक दल के नेता अजित पवार को अब कम से कम 36 विधायकों का आंकड़ा पूरा करना होगा और दलबदल कानून से बचने के लिए उन्हें ये काम 36 घंटे में ही पूरा करना होगा।
एनसीपी प्रमुख शरद पवार के ये कहने के बाद कि महाराष्ट्र में एनसीपी ने भाजपा को समर्थन नहीं दिया है अजित पवार का फैसला व्यक्तिगत है। पवार ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी में टूट हुई है कुछ विधायक अलग हुए हैं जिनके खिलाफ पार्टी कार्रवाई करेगी। ऐसे में साफ है कि एनसीपी से अलग हुए अजित पवार गुट का अपने विधायकों की नई पहचान देनी होगी।
पार्टी टूटने के कारण इन विधायकों पर दलबदल कानून लागू होगा। इसके लिए अजित पवार को 54 में कम से कम 36 विधायकों की आवश्यकता होगी। ऐसा नहीं होने पर उनके साथ आने वाले विधायकों की सदस्यता प्रभावित होगी। वहीं दलबदल कानून का दूसरा पहलू 36 घंटे की समय सीमा है यानि जिन विधायकों को पार्टी से अलग होकर अपनी अलग पहचान बनानी है उन सभी को ये फैसला 36 घंटे में लेना होगा।