सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में जल्द सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि हमारे पास इसके लिए समय नहीं है।
आज इस मामले में इस केस से जुड़े सभी पक्ष पेश हुए। सुब्रहमण्यम स्वामी की इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनसे पूछा कि आप इस मामले में पक्षकार भी नहीं है, ऐसे में आप जल्द सुनवाई की मांग क्यों करना चाहते हैं।
अपने जवाब में स्वामी ने कहा कि मैं इस मामले में पक्षकार नहीं हूं। ना ही मैं किसी तरह की संपत्ति का क्लेम कर रहा हूं। मैं बस एक धार्मिक आदमी की तरह इस मंदिर में पूजा करना चाहता हूं। मामला कोर्ट में अटका रहने की वजह से मैं पूजा से वंचित रह जा रहा है।
स्वामी के इस जवाब पर पलटवार करते हुए कोर्ट ने कहा कि हम आपकी भावनाओं को समझते हैं लेकिन हमारे पास इस मामले की त्वरित सुनवाई के लिए अभी वक्त नहीं है।
इसके पहले क्या-क्या हुआ था?
सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या विवाद का समाधान बातचीत से करने की सलाह के बाद श्रीराम जन्मभूमि के पक्षकार व अखिल भारतीय श्रीपंच रामानंदीय निर्वाणी अनी अखाड़ा हनुमानगढ़ी के श्रीमहंत धर्मदास सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राम मंदिर विवाद के हल के लिए अपना नया फार्मूला पेश करने के लिए दिल्ली रवाना हो गए।
अमर उजाला से बातचीत में महंत धर्मदास ने बताया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रहमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट 31 मार्च की तिथि तय की है। वह भी इस दिन सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर अपनी ओर से सुलह के लिए अर्जी देंगे।
महंत धर्मदास ने कहा राम जन्मभूमि का मसले पर कोर्ट को यह भी ध्यान रखना चाहिए की मुख्य बिंदु पर ही विचार हो, किसी भावना से ऑर्डर नहीं किया जा सकता। 10 हजार पेज की फाइल रखने से काम नहीं चलेगा, बीच का रास्ता निकालना पड़ेगा।
श्रीराम जन्मभूमि पर कुछ संत फैला रहे भ्रम: ज्ञानदास
हनुमानगढ़ी सागरिया पट्टी के महंत ज्ञानदास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या विवाद का समाधान बातचीत से करने की सलाह के बाद कुछ संतों का बयान आ रहा है कि श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला पधराए गए थे। कहा कि वर्ष 1949 में श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला का प्राकट्य हुआ था। उन्होंने कहा कि संत ऐसी गलत बयानी से बाज आएं।