महाराष्ट्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
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महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयां छू रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को विधानसभा में घोषणा की कि महाराष्ट्र अब दुनिया की 30वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने कहा कि यदि महाराष्ट्र एक स्वतंत्र देश होता, तो इसकी अर्थव्यवस्था ऑस्ट्रिया, थाईलैंड, नार्वे, फिलीपीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से भी बड़ी होती।
महाराष्ट्र की जीडीपी पिछले 10 वर्षों में बढ़कर 51 लाख करोड़ रुपये हुई
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य की विकास दर 7.9% है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। वर्ष 2013-14 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) लगभग 16 लाख करोड़ रुपये था, जो पिछले दस वर्षों में बढ़कर 51 लाख करोड़ रुपये (करीब 660 बिलियन डॉलर) तक पहुंच गया है। फडणवीस ने विश्वास जताया कि अगले दो-तीन वर्षों में महाराष्ट्र संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर को भी पीछे छोड़ देगा।
राज्य का कर्ज स्वीकार्य मानकों के भीतर
राज्य के कर्ज पर स्थिति स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में 51 लाख करोड़ रुपये की आय के मुकाबले कर्ज 9.32 लाख करोड़ रुपये है। आय के अनुपात में कर्ज का स्तर 18.2 फीसदी है, जो पूरी तरह स्वीकार्य मानकों के भीतर है। लाडकी बहिन और मुफ्त बिजली जैसी जन कल्याणकारी योजनाओं के बावजूद राजकोषीय घाटे को 2.78 फीसदी तक सीमित रखा गया है।
देश की कुल जीडीपी में महाराष्ट्र 14.9 फीसदी के साथ सर्वाधिक योगदान दे रहा है। फडणवीस ने लक्ष्य निर्धारित किया कि वर्ष 2029 तक राज्य की अर्थव्यवस्था 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर लेगी। इसके लिए बुनियादी ढांचे और निवेश पर विशेष जोर दिया जा रहा है।