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Mahakumbh: अमृत स्नान के बाद फिर क्यों जुटे श्रद्धालु, बीते दिनों में कितने लोग पहुंचे, जाम की स्थिति क्यों?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 10 Feb 2025 04:23 PM IST

सार

महाकुंभ में एक बार फिर इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की वजह क्या है? प्रयागराज के अंदर और बाहर के क्या हालात हैं? बीते दिनों में कितनी भीड़ प्रयागराज पहुंची है? इसके अलावा अब तक कितनी आबादी प्रयागराज पहुंच चुकी है? प्रशासन के इंतजामों की इसमें क्या भूमिका रही है? आइये जानते हैं...
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प्रयागराज में महाकुंभ। - फोटो : अमर उजाला
महाकुंभ में अमृत स्नान के दौरान श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ना आम बात है। हालांकि, अमृत स्नान के बाद भी प्रयागराज में भीड़ जुटने के जबरदस्त आंकड़े दर्ज किए जा रहे हैं। बीते कुछ दिनों की बात करें तो प्रयागराज के अंदर और बाहर कई मार्गों पर भारी जाम की स्थिति दर्ज की गई है। अहम राजमार्गों पर कई किलोमीटर लंबे जाम भी देखे गए हैं। 

इस बीच यह जानना अहम है कि आखिर महाकुंभ में एक बार फिर इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की वजह क्या है? प्रयागराज के अंदर और बाहर के क्या हालात हैं? बीते दिनों में कितनी भीड़ प्रयागराज पहुंची है? इसके अलावा अब तक कितनी आबादी प्रयागराज पहुंच चुकी है? प्रशासन के इंतजामों की इसमें क्या भूमिका रही है? आइये जानते हैं...
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प्रयागराज में महाकुंभ। - फोटो : अमर उजाला
महाकुंभ में अमृत स्नान के दौरान श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ना आम बात है। हालांकि, अमृत स्नान के बाद भी प्रयागराज में भीड़ जुटने के जबरदस्त आंकड़े दर्ज किए जा रहे हैं। बीते कुछ दिनों की बात करें तो प्रयागराज के अंदर और बाहर कई मार्गों पर भारी जाम की स्थिति दर्ज की गई है। अहम राजमार्गों पर कई किलोमीटर लंबे जाम भी देखे गए हैं। 

इस बीच यह जानना अहम है कि आखिर महाकुंभ में एक बार फिर इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की वजह क्या है? प्रयागराज के अंदर और बाहर के क्या हालात हैं? बीते दिनों में कितनी भीड़ प्रयागराज पहुंची है? इसके अलावा अब तक कितनी आबादी प्रयागराज पहुंच चुकी है? प्रशासन के इंतजामों की इसमें क्या भूमिका रही है? आइये जानते हैं...

महाकुंभ में अब तक क्या रहा है श्रद्धालुओं के पहुंचने का आंकड़ा?
  • महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी से हुई थी। यानी अगर 9 फरवरी तक का आंकड़ा ले लें तो महाकुंभ को 28 दिन हो चुके हैं। यूपी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, महाकुंभ में इन 27 दिनों में ही 44 करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं। यानी औसतन प्रतिदिन करीब 1.62 करोड़ लोग। 
  • महाकुंभ में स्नान के दिनों में भीड़ का आंकड़ा अनुमानित तौर पर ज्यादा रहता है। 14 जनवरी (मकर संक्रांति), 29 जनवरी (मौनी अमावस्या), 3 फरवरी (बसंत पंचमी) का स्नान पूर्ण हो चुका है। 

इस लिहाज से तीन स्नानों में ही 14 करोड़ से ज्यादा लोग महाकुंभ में पहुंच चुके हैं। यानी बाकी बचे 24 दिनों में 30 करोड़ लोगों ने प्रयागराज में डुबकी लगाई है। इसका मतलब है कि हर दिन करीब 1.25 करोड़ लोग प्रयागराज में डुबकी लगाने पहुंचे हैं।

महाकुंभ में स्नान से पहले कितनी भीड़ जुटी?
प्रयागराज में बीते तीन दिन से महाजाम की शिकायतें आई हैं। खासकर 8 फरवरी के बाद से प्रयागराज को दूसरे जिलों से जोड़ने वाले राजमार्गों पर भारी जाम की शिकायतें की गईं। अमर उजाला ने लगातार तीन दिनों तक प्रयागराज के नक्शे के जरिए जाम की स्थिति बताई। इनमें प्रयागराज आने-जाने वाले रास्तों पर जबरदस्त भीड़ की बात सामने आई। 



चौंकाने वाली बात यह है कि महाकुंभ में रविवार (9 फरवरी) को 1 करोड़ 57 लाख से ज्यादा श्रद्धालु डुबकी लगाने पहुंचे हैं। इसमें 1 करोड़ 47 लाख श्रद्धालु और 10 लाख कल्पवासी शामिल रहे। इसके अलावा शनिवार (8 फरवरी) को महाकुंभ में 1 करोड़ 32 लाख श्रद्धालु संगम मे स्नान के लिए पहुंचे। शुक्रवार (7 फरवरी) को प्रयागराज में 94 लाख लोग पहुंचे थे। इसी दिन शहर में महाकुंभ के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 40 करोड़ के पार हो गया। वहीं, गुरुवार (6 फरवरी) को यह आंकड़ा 78 लाख ही था।

महाकुंभ में कैसे घटी-बढ़ी भीड़
  • महाकुंभ के शुरुआती 16 दिन में दो शाही स्नान हो चुके थे। तब तक करीब 27 करोड़ लोग संगम में स्नान कर चुके थे। यानी हर दिन 1 करोड़ 68 लाख लोगों से ज्यादा। 
  • अगले 11 दिनों में (30 जनवरी से 9 फरवरी तक) 16 करोड़ लोग दर्शन के लिए पहुंचे। इनमें 3 फरवरी को होने वाले बसंत पंचमी के शाही स्नान का दिन भी शामिल रहा, जिसमें पिछले दोनों शाही स्नान से कम भीड़ पहुंची। इन 11 दिनों में हर दिन औसतन 1 करोड़ 45 लाख लोग महाकुंभ पहुंचे। यानी हर दिन के औसत से करीब 20 लाख लोग कम।
  • माना जा रहा है कि भीड़ के कुछ कम होने की एक वजह 29 जनवरी को प्रयागराज मेला क्षेत्र में हुई भगदड़ रही। इस दिन 8 करोड़ लोग पहुंचे थे। हालांकि, दुर्घटना की जानकारी मिलने के बाद अधिकतर लोगों ने प्रयागराज जाने के अपने फैसले को टाल दिया। इसका असर यह हुआ कि प्रयागराज में भीड़ धीरे-धीरे कम होने लगी। सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हुए, जिनमें मेला क्षेत्र में कई जगहों को खाली दिखाया गया। 

आखिरी दो स्नानों से पहले इतनी भीड़ जुटने की वजह क्या?
  • 29 जनवरी को हुए हादसे के बाद प्रशासन ने भी सख्ती दिखाई थी और बसंत पंचमी के शाही स्नान के लिए सरकार ने सुरक्षा और परिवहन से जुड़े जबरदस्त इंतजाम किए। इसके चलते श्रद्धालुओं ने बसंत पंचमी के बाद ही प्रयागराज जाने का मन बनाया।
  • महाकुंभ में 5 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दर्शन के लिए पहुंचे। वीवीआईपी दर्शन के चलते इस दिन तक प्रयागराज में भीड़ की संख्या घटी थी। माना जा रहा है कि वीवीआईपी दर्शन की वजह से लोगों ने पांच फरवरी तक महाकुंभ में न जाने का मन बनाया।

  • हालांकि, पीएम मोदी के दर्शन के बाद लोगों में एक बार फिर प्रयागराज में स्नान  के लिए जाने की उमंग जागी। इसका असर यह हुआ कि प्रयागराज में 6 फरवरी से 9 फरवरी तक 4.5 करोड़ लोग संगम में डुबकी लगाने पहुंच गए।
  • सरकार ने 7 फरवरी से महाकुंभ मेला क्षेत्र में सांस्कृति कार्यक्रमों के आयोजनों का एलान कर दिया। इनमें देश की विविध संस्कृतियों को दिखाने से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिन्हें देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचने लगी है। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की वजह से प्रशासन की तैयारियां एक बार फिर कम पड़ती दिखने लगीं।

प्रयागराज के अंदर कैसा है श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने का असर
बढ़ती भीड़ का असर प्रयागराज के अंदर भी देखने को मिल रहा है। संगम पर शनिवार को एक बार फिर बेतहाशा भीड़ उमड़ने से प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। सुबह ही महाकुंभ मेला के सेंट्रल एनाउंस प्वाइंट से संगम नोज को खाली करने की अपील की जाने लगी। पुलिस अफसर बार-बार आग्रह कर रहे थे कि संगम पर भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है, ऐसे में लोग घाट को खाली कर दें, ताकि किसी को असुविधा का सामना न करना पड़े।  
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