टाटा-एयरबस द्वारा अपनी विमान विनिर्माण परियोजना के लिए गुजरात को चुनने से उठे विवाद पर महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूर्व सरकार को निशाने पर लिया है। यह झूठा आख्यान बनाया जा रहा है कि हमारी सरकार के सत्ता में आने के बाद महाराष्ट्र से बड़े-बड़े प्रोजेक्ट जा रहे हैं। यह सच नहीं है। परियोजनाओं के नुकसान के लिए पिछली (महा विकास अघाड़ी) सरकार दोषी है।
कंपनी के अधिकारियों ने कहा था, राज्य में निवेश का माहौल नहीं
फडणवीस ने सोमवार को कहा कि कंपनी के अधिकारियों ने पिछले साल राज्य में निवेश का अनुकूल माहौल नहीं होने की बात कही थी। फडणवीस ने विवाद के बीच दावा किया कि परियोजना को महाराष्ट्र से ले जाने का फैसला उस समय लिया गया जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे। महाराष्ट्र में नवंबर 2019 से जून 2022 तक शिवसेना नीत महा विकास आघाड़ी सरकार थी।
सी-295 सैन्य परिवहन विमान के उत्पादन की 22,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना महाराष्ट्र से गुजरात के वड़ोदरा में स्थानांतरित हो जाने को लेकर एकनाथ शिंदे सरकार और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नीत विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप के बीच फडणवीस ने यह दावा किया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि मैंने 24 अप्रैल, 2021 को टाटा एयरबस रक्षा परियोजना के प्रमुखों को व्यक्तिगत रूप से मेरे आवास ‘सागर’ पर बुलाया था, जबकि मैं राज्य में विपक्ष का नेता था। मैंने उनसे बात की और उन्हें बताया कि एक वरिष्ठ नेता के रूप में मैं तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से महाराष्ट्र में परियोजना के लिए बात करूंगा।
फडणवीस बोले, 2019 तक कंपनी से बात करता रहा
फडणवीस ने कहा कि हालांकि उन्होंने मुझसे कहा कि यहां का माहौल निवेश जैसा नहीं है देवेंद्र जी। महाराष्ट्र के 2014 से 2019 तक मुख्यमंत्री रहे फडणवीस ने कहा कि वह 2016 से कंपनियों के साथ इस बारे में बातचीत कर रहे थे और 2019 तक करते रहे थे। उन्होंने कहा कि नई सरकार (उद्धव ठाकरे की) बनने के बाद मैंने देखा कि पहले लिए गए कुछ फैसलों को बदल दिया गया। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि परियोजना का संभवत: इसलिए विरोध किया गया क्योंकि उसे उनके गृह जिले नागपुर में लाया जा रहा था।
उन्होंने कहा कि विपक्ष समाज में गलत तरह की धारणा फैला रहा है जिसने ढाई साल केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना में निकाल दिए। फडणवीस ने कहा कि फ्रांसीसी एविएशन कंपनी साफरान ने अपनी इकाई 2021 में तेलंगाना के हैदराबाद में खोली। लेकिन विपक्ष इस परियोजना के चले जाने के लिए हमें जिम्मेदार ठहरा रहा है।