मुंबई के पवई इलाके में रिकॉर्डिंग स्टूडियो में 17 बच्चों और दो वयस्कों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्या की मौत पर स्वतंत्र मजिस्ट्रेट जांच शुरू हो गई है। बता दें कि बीते गुरुवार को आरए स्टूडियो में 17 बच्चों को बंधक बनाए गए बच्चों को बचाते समय पुलिस की कार्रवाई में गोली लग गई थी। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
उसकी मौत को लेकर संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून और व्यवस्था) सत्यनारायण चौधरी ने सोमवार को बताया कि कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के तहत मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा पुलिस की एकमात्र प्राथमिकता थी। चौधरी ने दावा किया कि पुलिस के दो घंटे तक समझाने के बाद भी आर्य बंधकों को नहीं छोड़ रहे थे। आरोपी के हथियार और ज्वलनशील सामग्री ले जाने के कारण पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। चौधरी के अनुसार, आर्य ने पहले हवा में गोली चलाई, जिसके जवाब में एक पुलिसकर्मी ने उस पर गोली चलाई।
शनिवार को हुआ था अंतिम संस्कार
रोहित के शव का मुंबई के जेजे अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ और फिर उसका शव पुणे उसके घर ले जाया गया था। शनिवार तड़के रोहित आर्य का अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिसमें रोहित की पत्नी, बेटा और परिवार के अन्य करीबी लोग ही शामिल हुए थे। पुलिस के अनुसार, रोहित बीते कुछ समय से अपने परिवार से अलग रह रहा था। शुरुआती जांच में पता चला है कि रोहित का हाल के वर्षों में अपने परिवार के साथ बहुत कम संपर्क था।
100 बच्चों को ऑडिशन के लिए बुलाया था
पुणे निवासी रोहित आर्य ने एक वीडियो जारी कर बच्चों को वेब सीरीज में एक्टिंग के लिए ऑडिशन पर बुलाया था। उसने 15 वर्ष की उम्र के करीब 100 बच्चों को बुलाया था। इनमें लड़के-लड़कियां दोनों शामिल थीं। बाद में उसने 17 बच्चों व दो अन्य लोगों को बंधक बना लिया। पुलिस उपायुक्त दत्ता नलावडे ने घटना वाले दिन बताया था कि पुलिस को दोपहर करीब 1:30 बजे सूचना मिली कि महावीर क्लासिक बिल्डिंग में आरए स्टूडियो के अंदर एक व्यक्ति ने बच्चों को बंधक बना लिया है। पवई पुलिस के अधिकारी त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी), बम निरोधक दस्ते और दमकल विभाग की एक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। आर्य के पास एक एयर गन और कुछ रसायन भी थे। इसलिए बेहद सावधानी से ऑपरेशन चलाकर बच्चों को मुक्त कराया गया। पुलिस की गोलीबारी में घायल रोहित को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सरकारी टेंडर का पैसा नहीं मिलने का किया था दावा
रोहित आर्य पुणे का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि रोहित आर्या को एक स्कूल के काम का सरकारी टेंडर मिला हुआ था। रोहित का कहना था कि उसे अपने द्वारा किये गए काम के पैसे नही मिले थे। रोहित ने अपने बकाया पैसे के लिए कई बार आंदोलन भी किया था। रोहित का कहना था कि उसका दो करोड़ रुपया बकाया था। कहा जा रहा है कि उसने इसी कारण बच्चों को बंधक बनाया था। महाराष्ट्र भी रोहित आर्य के भुगतान संबंधी मामले की जांच कर रही है। शुक्रवार को महाराष्ट्र के मंत्री दादा भुसे ने कहा कि उन्होंने बच्चों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्य के शिक्षा विभाग के साथ किए गए काम के बारे में रिपोर्ट मांगी है।
आर्य ने वीडियो जारी कर दी थी स्टूडियो में आग लगाने की धमकी
बच्चों को बंधक बनाने के बाद रोहित आर्य ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर स्टूडियो में आग लगाने की धमकी दी थी। उसमें रोहित ने कहा था, मैं रोहित आर्य हूं। आत्महत्या करने के बजाय, मैंने एक योजना बनाई और कुछ बच्चों को बंधक बना लिया। मेरी बहुत साधारण और नैतिक मांगें हैं। मेरे कुछ सवाल हैं जिनके जवाब चाहता हूं। मैं कुछ लोगों से बात करना चाहता हूं और उनके उत्तरों के आधार पर, यदि कोई प्रति-प्रश्न हों, तो मैं उनसे पूछना चाहता हूं। लेकिन मुझे ये उत्तर चाहिए। मुझे और कुछ नहीं चाहिए। मैं आतंकवादी नहीं हूं, न ही मेरी कोई पैसों की मांग है। मैं बस साधारण बातचीत करना चाहता हूं। आर्य ने कहा था अगर उसकी बात नहीं मानी गई तो वह स्टूडियो में आग लगा देगा।
ये सवाल अकेले मेरे नहीं, इनसे बहुत लोगों का समाधान होगा
आर्य ने वीडियो में कहा था, मैं जो सवाल पूछना चाहता हूं वह अकेले मेरे सवाल नहीं हैं, बहुत सारे लोग इन्हें पूछना चाहते हैं। मैं कुछ लोगों से इनके जवाब मांगकर बहुत सारे लोगों की मदद करना चाहता हूं। इससे बहुत लोगों की समस्याओं का समाधान होगा। अगर मेरी बात नहीं मानी जाती तो मैं यहां आग लगा दूंगा और उसके बाद मैं नहीं जानता क्या होगा। बच्चे मर सकते हैं, उन्हें ट्रॉमा हो सकता है और इस सबका जिम्मेदार मैं नहीं होऊंगा।
समझिए पूरा घटनाक्रम
बता दें कि ये घटनाक्रम 30 अक्तूबर को गुरुवार दोपहर 1:30 बजे से शाम 5:15 बजे के बीच पवई के महावीर क्लासिक बिल्डिंग स्थित आरए स्टूडियो में हुआ था। पुलिस ने घंटों की मशक्कत के बाद सभी बंधकों को सुरक्षित बचा लिया था, जबकि 50 वर्षीय रोहित आर्य पुलिस फायरिंग में मारा गया था। आर्य को गोली लगने के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जांच में पता चला है कि उसने यह योजना पहले से बनाई थी। बताया जा रहा है कि वह शिक्षा विभाग से अपने एक प्रोजेक्ट के बकाए पैसे को लेकर नाराज था। हालांकि सरकार ने उसका दावा खारिज कर दिया था।