मद्रास हाईकोर्ट में गुरुवार को जस्टिस धर्मलिंगम लिंगेश्वरन और बी. कार्तिकेयन ने अतिरिक्त जजों के रूप में शपथ ली। हाईकोर्ट परिसर में आयोजित समारोह में मुख्य न्यायाधीश एस. ए. धर्माधिकारी ने दोनों को पद की शपथ दिलाई। इन नियुक्तियों के बाद मद्रासहाई कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 67 हो गई है। हालांकि, अदालत में जजों के कुल 75 पद स्वीकृत हैं, यानी अभी भी आठ पद खाली हैं।
सादे समारोह में हुआ नए जजों का स्वागत
दोनों जजों के शपथ ग्रहण समारोह में एडवोकेट जनरल विजय नारायण, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ए. आर. एल. सुंदरेशन, तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल के अध्यक्ष और विभिन्न बार एसोसिएशनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने नए जजों का स्वागत किया और उन्हें शुभकामनाएं दीं। इसके जवाब में जस्टिस लिंगेश्वरन और जस्टिस कार्तिकेयन ने बेंच और बार के सदस्यों का आभार जताया।
तमिल साहित्य से कानून तक का सफर, जस्टिस लिंगेश्वरन की कहानी
जस्टिस धर्मलिंगम लिंगेश्वरन का जन्म 10 मई 1974 को तिरुनेलवेली जिले में हुआ था। उन्होंने तमिल विषय में बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) की डिग्री हासिल की। इसके बाद चेन्नई के डॉ. अंबेडकर गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से बी.एल. (बीएल) की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने 9 अगस्त 2000 को वकील के रूप में अपना पंजीकरण कराया और वकालत शुरू की। कानूनी क्षेत्र में काम करने के बाद वर्ष 2013 में उन्हें सीधे जिला न्यायाधीश के पद पर नियुक्त किया गया। अब मद्रास हाई कोर्ट में अतिरिक्त जज के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी शुरू हुई है।
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सिविल मामलों में रहा जस्टिस बी. कार्तिकेयन का अनुभव
वहीं, जस्टिस बी. कार्तिकेयन का जन्म 9 दिसंबर 1973 को हुआ था। उन्होंने वर्ष 1996 में बी.एल. (बीएल) की पढ़ाई पूरी की और वकील के रूप में पंजीकरण कराने के बाद मुख्य रूप से सिविल मामलों की पैरवी की। वर्ष 2005 में उन्हें जिला न्यायाधीश नियुक्त किया गया। न्यायिक सेवा में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्होंने चेन्नई में प्रधान जिला न्यायाधीश के रूप में भी काम किया। इसके बाद उन्हें मद्रास हाई कोर्ट में पदोन्नत किया गया, जहां अब उन्होंने अतिरिक्त जज के रूप में शपथ ली है।