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Live-In Relationship:'महिलाओं को मिले पत्नी का दर्जा', लिव-इन मामलों पर मद्रास हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

Wed, 21 Jan 2026 12:57 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मदुरै

सार

न्यायमूर्ति श्रीमथी ने स्पष्ट किया कि जो पुरुष आधुनिकता के नाम पर महिलाओं का फायदा उठाते हैं और शादी के वादे से मुकर जाते हैं, वे कानून से नहीं बच सकते। उन्होंने कहा कि यदि शादी संभव नहीं है, तो ऐसे मामलों में पुरुषों को कानून का सामना करना ही होगा और इस संदर्भ में बीएनएस की धारा 69 महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक अहम प्रावधान है।
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मद्रास हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि गंधर्व विवाह की प्राचीन अवधारणा के तहत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को पत्नी का दर्जा दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने साथ ही यह भी टिप्पणी की कि इससे महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
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अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आधुनिक सामाजिक ढांचे में कमजोर महिलाओं की रक्षा करना न्यायपालिका की जिम्मेदारी है, क्योंकि लिव-इन संबंधों में उन्हें वैसी कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती जैसी विवाहित महिलाओं को प्राप्त होती है। 

गंधर्व विवाह का जिक्र कर की बड़ी टिप्पणी
तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के मनप्पराई महिला पुलिस स्टेशन द्वारा गिरफ्तार किए गए एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए पीठ ने ये टिप्पणियां कीं। शख्स पर आरोप था कि उसने शादी का झूठा वादा कर महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में वादे से मुकर गया। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने कहा, 'लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं को गंधर्व विवाह या प्रेम विवाह के तहत पत्नी का दर्जा देकर संरक्षण दिया जाना चाहिए। जिससे ऐसे संबंधों में अस्थिरता होने की स्थिति में भी उन्हें पत्नी के रूप में अधिकार मिल सकें।'
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क्या है मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी व्यक्ति लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हुए महिला का शोषण करता रहा। इस दौरान वह शादी का आश्वासन देता रहा, लेकिन बाद में उसने शादी से इनकार कर दिया। मामले में गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने अग्रिम जमानत की मांग की।

याचिका खारिज करते हुए अदालत ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता हुआ माना। यह धारा धोखे या शादी के झूठे वादे पर आधारित यौन संबंधों को आपराधिक कृत्य मानती है।

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कानूनी दांव-पेंचों के दुरुपयोग पर सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति एस. श्रीमथी ने कहा कि आधुनिकता के नाम पर कई पुरुष इस कानूनी दांव-पेंच का फायदा उठाते हैं। जब संबंध बिगड़ते हैं तो महिला के चरित्र पर सवाल खड़े कर देते हैं। उन्होंने कहा कि पुरुष खुद को आधुनिक बताते हैं, लेकिन संबंध टूटते ही महिलाओं को बदनाम करने लगते हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि भारत में भले ही लिव-इन रिलेशनशिप को अभी भी सांस्कृतिक रूप से झटके के तौर पर देखा जाता हो, लेकिन यह समाज में आम हो चुका है। कई युवा महिलाएं आधुनिक जीवनशैली अपनाने की चाह में ऐसे संबंधों में जाती हैं, लेकिन बाद में उन्हें एहसास होता है कि कानून उन्हें वैसी सुरक्षा नहीं देता जैसी विवाह में मिलती है।

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