दूसरी पत्नी के या अवैध संतानों को पिता की सरकारी नौकरी पर कोई हक नहीं मिल सकता। मद्रास हाइकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि अवैध संतान अपने पिता की संपति में अधिकार की तरह उनकी नौकरी पर भी दावा नहीं कर सकती। संपति पर अधिकार और अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाना दोनों पूरी तरह अलग अलग मामले हैं इनमें कोई समानता नहीं है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार मद्रास हाइकोर्ट की जज पुष्पा सत्यानारायण ने यह निर्णय एम मुथुराज की याचिका पर सुनाया, जिन्होंने अपने सब इंस्पेक्टर पिता की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर उनकी नौकरी पर दावा ठोंका था। कोर्ट ने कहा सेवा नियमावली में यह साफ लिखा है दूसरी विधवा के बच्चों को पिता की नौकरी पर तब तक अधिकार नहीं मिल सकता जब तक विशेष परिस्थितियों में शासन दूसरी शादी को अनुमति न दे दे।
कोर्ट ने कहा अनुकंपा के आधार पर नौकरी और संपति में अधिकार दोनों अलग अलग मामले हैं। किसी भी मायने में वह एक जैसे नहीं हो सकते। अनुकंपा नौकरी कोई संपति नहीं है जिसकी वसीयत की जा सके।
बता दें कि मुथुराज के पिता पी मलियप्पन तमिलनाडु पुलिस में सब इंस्पेक्टर थे और उन्होंने अपनी अपनी पत्नी सरोजा की छोटी बहन से शदी कर ली थी। क्योंकि उनकी पत्नी को कोई बच्चा नहीं हो सकता था। 8 अप्रैल 2008 में एक दुर्घटना में मलियप्पन की मौत हो गई।