मद्रास हाईकोर्ट ने छोटे बच्चों पर से बस्ते और होमवर्क का बोझ हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे न तो वेटलिफ्टर हैं और न ही किताबों से भरे स्कूल बैग ढोने वाले। अदालत ने केंद्र सरकार से सभी राज्यों को पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों के बस्ते का भार घटाने और होमवर्क न देने का निर्देश जारी करने को कहा है। कोर्ट केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चार हफ्ते में अनुपालना रिपोर्ट देने को कहा है।
अपने अंतरिम आदेश में अदालत ने राज्य सरकारों से कहा कि वह सुनिश्चित करें कि बस्ते का भार बच्चों के भार से 10 फीसदी से ज्यादा न हो। न्यायमूर्ति एन किरुबकरण ने तेलंगाना और महाराष्ट्र सरकारों के आदेश का हवाला देते हुए केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘चिल्ड्रन स्कूल बैग पॉलिसी’ को लागू करने का निर्देश दे।
कोर्ट ने सीबीएसई, बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी और एसोसिएशन ऑफ मैनेजमेंट ऑफ प्राइवेट स्कूल को निर्देश दिया है कि वह एनसीईआरटी किताबें ही पढ़ने को कहें और उन्हीं का इस्तेमाल करें। जस्टिस किरुबकरण ने याचिकाकर्ता एवं वकील एम पुरुषोत्तमन की याचिका यह फैसला सुनाया।