फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Madras High Court: मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- सहमति संबंध में गर्भपात, नाबालिग का नाम उजागर करना जरूरी नहीं

Sat, 19 Aug 2023 05:50 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

शीर्ष अदालत ने कहा था कि नाबालिग और उनके माता-पिता को दो विकल्पों का सामना करना पड़ सकता है- या तो वे आरएमपी से संपर्क करें और पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्यवाही में शामिल हों या फिर गर्भपात के लिए किसी अप्रशिक्षित चिकित्सक से संपर्क करें।
विज्ञापन
मद्रास हाईकोर्ट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि सहमति से यौन संबंध के कारण गर्भवती हुई किसी नाबालिग के गर्भपात के लिए संपर्क करने पर चिकित्सक को उसका नाम उजागर करना आवश्यक नहीं है। पॉक्सो अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के लिए गठित जस्टिस एन आनंद वेंकटेश और जस्टिस सुंदर मोहन की विशेष पीठ ने हाल ही में यह आदेश दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पूर्व में आए ऐसे ही एक मामले में उसके दिशानिर्देशों का उल्लेख किया गया।

पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब सहमति से यौन संबंध के कारण गर्भवती हुई कोई नाबालिग एक पंजीकृत चिकित्सा पेशेवर से गर्भपात के लिए संपर्क करती है तो वह चिकित्सक पॉक्सो की धारा 19(1) के तहत अपराध संबंधी सूचना संबंधित अधिकारियों को देने के लिए बाध्य होता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नाबालिग और उसके माता-पिता सूचना प्रदान करने की अनिवार्यता से अवगत हो सकते हैं, लेकिन वे खुद को कानूनी प्रक्रिया में उलझाना नहीं चाहते हों।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि नाबालिग और उनके माता-पिता को दो विकल्पों का सामना करना पड़ सकता है- या तो वे आरएमपी से संपर्क करें और पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्यवाही में शामिल हों या फिर गर्भपात के लिए किसी अप्रशिक्षित चिकित्सक से संपर्क करें। अगर पॉक्सो के तहत नाबालिग के नाम का खुलासा करने पर जोर दिया जाता है तो सुरक्षित गर्भपात के लिए आरएमपी के पास जाने की संभावना कम हो सकती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें