मद्रास हाईकोर्ट ने 10वीं और 12वीं के सर्टिफिकेट में जन्म की तारीख बदलने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने पाया कि यदि तारीख में बदलाव किया जाता है तो याचिकाकर्ता द्वारा हासिल की गई सभी क्वालिफिकेशन अमान्य हो जाएगी।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एस. वैद्यनाथन ने कहा, ‘अदालत सहानुभूति के आधार पर इस मुद्दे पर निर्णय नहीं ले सकती है। इससे कोई भी जन्म की तारीख में बदलाव करवाने के लिए अदालत पहुंच जाएगा।’
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता एस. इंदुमति के पिता ने पहली क्लास में एडमिशन कराने लिए जन्म की वास्तविक तारीख 17 जुलाई 1997 में बदलाव कर 17 मई कर दिया था।
उस समय याचिकाकर्ता की उम्र पहली क्लास में एडमिशन के योग्य नहीं थी। अभी उसके सर्टिफिकेट में 17 मई की तारीख ही दर्ज है। नगर निगम में भी वास्तविक तारीख ही दर्ज है। इंदुमति ने इससे पहले स्कूल एजुकेशन बोर्ड में तारीख बदलाव के लिए संपर्क किया था। यहां सुनवाई नहीं होने पर वह हाईकोर्ट पहुंची।