2020 में वीसीके नेता और लोकसभा सांसद थोल थिरुमावलवन ने एक ऑनलाइन सम्मेलन में भारतीय महिलाओं को लेकर टिप्पणी की थी। इसे लेकर मद्रास हाईकोर्ट में निजी शिकायत की गई थी। मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पी वेलमुरुगन ने एक आदेश जारी करके शिकायत को खारिज कर दिया।
मद्रास हाईकोर्ट ने विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) प्रमुख थोल थिरुमावलवन के खिलाफ महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने की निजी शिकायत को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि थिरुमावलवन ने मनु स्मृति का हवाला देते हुए टिप्पणी की थी। उन्होंने मनु स्मृति के बारे में बात की थी। उनका इरादा नफरत फैलाने का नहीं था। इसलिए थिरुमावलवन पर लगाए गए आरोप अपराध की श्रेणी में नहीं आते हैं।
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दरअसल 2020 में वीसीके नेता और लोकसभा सांसद थोल थिरुमावलवन ने एक ऑनलाइन सम्मेलन में भारतीय महिलाओं को लेकर टिप्पणी की थी। इसे लेकर मद्रास हाईकोर्ट में निजी शिकायत की गई थी। मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पी वेलमुरुगन ने एक आदेश जारी करके शिकायत को खारिज कर दिया। साथ ही लोकसभा सांसद थिरुमावलवन द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया। न्यायाधीश ने कहा कि शिकायत में आरोप था कि थिरुमावलवन का जो भाषण एक यूट्यूब चैनल पर प्रसारित किया गया था वह भारतीय महिलाओं के खिलाफ था। मगर रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से सामने आया कि थिरुमावलवन ने भाषण के दौरान मनु स्मृति पुस्तक का उल्लेख किया था।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे में न्यायालय को लगता है कि थिरुमावलवन ने कोई भी अपराध नहीं किया है। भाषण को सुनने के बाद हमें लगता है कि थिरुमावलवन ने मनु स्मृति पुस्तक का उल्लेख किया है। मनु स्मृति में लिखी बात को उन्होंने सामान्य बोलचाल में कही है। इसलिए मनु स्मृति पुस्तक में जो कहा गया है, वह केवल उसका भाषण था। इसलिए न्यायालय को नहीं लगता कि शिकायत में लगाया गया कोई भी आरोप अपराध सिद्ध होता है। इसके साथ ही शिकायत पर मुकदमा चलाने के लिए रिकॉर्ड पर कुछ भी उपलब्ध नहीं है।
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न्यायाधीश ने कहा कि हमें लगता है कि थिरुमावलवन का कोई भी नफरत फैलाने वाला भाषण देने का इरादा नहीं था और वह किसी को प्रभावित नहीं कर रहा था और उसका भाषण केवल सामान्य बोलचाल में था। न्यायाधीश ने कहा, इसलिए थिरुमावलवन की याचिका स्वीकार की जाती है। साथ ही जिला मुंसिफ-सह-न्यायिक मजिस्ट्रेट, पेरायुर, मदुरै जिले की फाइल पर निजी शिकायत को खारिज किया जाता है।