मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु पुलिस द्वारा टीवीके नेता आधव अर्जुन के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द कर दिया। यह एफआईआर 29 अक्तूबर को किए गए एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दर्ज हुई थी। इसमें कथित तौर पर राज्य सरकार के खिलाफ नेपाल जैसी विद्रोह जैसी कार्रवाई के लिए कहा था। पोस्ट के सामने आते ही व्यापक आलोचना हुई और बाद में इसे डिलीट कर दिया गया।
तमिलनाडु पुलिस ने इस आधार पर अर्जुन के खिलाफ मामला दर्ज किया कि पोस्ट से हिंसा भड़क सकती थी और यह कानून-व्यवस्था के लिए खतरा था। जस्टिस जगदीश चंद्रा की बेंच ने अर्जुन की याचिका पर सुनवाई करते हुए एफआईआर को रद्द कर दिया। याचिका में कहा गया था कि पोस्ट को गलत तरीके से समझा गया और इसका उद्देश्य हिंसा भड़काना नहीं था।
अदालत ने माना एफआईआर उचित नहीं
अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर को जारी रखना उचित नहीं है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आने वाला मामला है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट को आपराधिक इरादे से जोड़ने के लिए ठोस सामग्री होनी चाहिए, जो इस मामले में नहीं पाई गई। इसके साथ ही इस मामले पर चल रही सभी कानूनी कार्यवाहियां समाप्त हो गईं।
विजय को नहीं मिली रैली की इजाजत
27 सितंबर को विजय करूर जिलों में तीसरे फेज का चुनाव कैंपेन करने के लिए जाने वाले थे। ऐसे में उन्हें वहां पहुंचने में देर हो गई। इससे उनकी रैली में भगदड़ मच गई। करूर में कैंपेन के दौरान भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई। इसमें सौ से अधिक लोग घायल हो गए, इसलिए विजय ने हादसे के बाद कुछ समय के लिए अपना कैंपेन रोक दिया.
ऐसे में करूर हादसे के 54 दिन बाद विजय ने फिर से कैंपेन शुरू कर दिया है, क्योंकि असेंबली चुनाव में सिर्फ पांच महीने बचे हैं, इसलिए टीवीके चीफ ने 4 दिसंबर को सलेम में अपना अगला कैंपेन करने का फैसला किया है। फिलहाल उन्हें इजाजत नहीं मिली है।