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Madras HC Updates: तमिलनाडु सरकार ने जिंदा व्यक्ति के नाम पर शुरू की योजना, अदालत पहुंचे AIADMK सांसद षणमुगम

Fri, 01 Aug 2025 01:22 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
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मद्रास हाईकोर्ट। - फोटो : ANI
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मद्रास हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि तमिलनाडु सरकार जो भी नई योजना शुरू करे, वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार होनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुंदर मोहन की पीठ ने यह बात AIADMK के सांसद सीवी षणमुगम और वकील इनियान की याचिका पर सुनवाई करते हुए कही।

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सांसद षणमुगम ने अपनी याचिका में अदालत से गुजारिश की थी कि जब तक यह मामला निपट नहीं जाता, तब तक राज्य सरकार को किसी बी जिंदा व्यक्ति के नाम पर कोई योजना शुरू करने या पहले से चल रही योजना का नाम बदलने से रोका जाए। षणमुगम ने यह भी मांग की कि चुनाव आयोग और सरकारी विज्ञापन की निगरानी करने वाली विषय-वस्तु विनियमन समिति डीएमके पार्टी के खिलाफ जरूरी कदम उठाएं, क्योंकि उन्होंने एक सरकारी योजना में 'स्टालिन' नाम का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि यह नियमों का उल्लंघन है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

सरकार ने उंगलुदन स्टालिन नाम से शुरू की योजना 
जब यह मामला अदालत में आया, तो याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील विजय नारायण ने बताया कि सरकार ने 'उंगलुदन स्टालिन' नाम से एक योजना शुरू की है। उन्होंने बताया कि इसके लिए एक विज्ञापन भी जारी किया गया था, जिसमें डीएमके के तीन नेताओं की तस्वीरें थीं, मुख्यमंत्री का नाम और पार्टी का चुनाव चिह्न भी था। यह सब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस बारे में शिकायत भेजी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
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दो अगस्त को एक और योजना शुरू करने जा रही सरकार
उन्होंने यह भी कहा कि 2 अगस्त को सरकार एक और योजना शुरू करने जा रही है, इसलिए इस बार फिर से ऐसा न हो, कोर्ट को इस पर रोक लगानी चाहिए। सरकार की तरफ से महाधिवक्ता पीएस रमन ने कहा कि मुख्यमंत्री की तस्वीर का इस्तेमाल करना नियमों के तहत है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही यह साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिस विज्ञापन की बात की जा रही है, वह सरकार द्वारा जारी नहीं किया गया था। सरकारी विज्ञापन की असली कॉपी दिखाते हुए उन्होंने बताया कि उसमें पार्टी का कोई चुनाव चिह्न नहीं था और उसमें डीआईपीआर कोड भी था। जब कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील विजय नारायण से पूछा कि यह विज्ञापन उन्हें कहां से मिला, तो उन्होंने बताया कि यह उन्हें ट्विटर से मिला था।

कोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग से एक हफ्ते के भीतर मांगा जवाब
डीएमके पार्टी की ओर से वरिष्ठ वकील पी. विल्सन ने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं ने झूठा मामला पेश किया है। उन्होंने आगे कहा कि यह राजनीति से प्रेरित है। पीठ ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग से एक हफ्ते के भीतर अपने जवाब दाखिल करने को कहा। इसके बाद, याचिकाकर्ता तीन दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करें। इसके बाद, पीठ मामले की अंतिम सुनवाई करेगी।

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मद्रास हाईकोर्ट ने विमान दुर्घटनाओं पर मीडिया रिपोर्टिंग के नियम तय करने वाली याचिका खारिज की
मद्रास हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को एक याचिका खारिज कर दी, जिसमें मांग की गई थी कि अधिकारियों को यह निर्देश दिया जाए कि वे विमान हादसों पर मीडिया में रिपोर्टिंग के लिए नियम बनाएं और लागू करें। इसका मकसद यह था कि जब तक आधिकारिक जांच पूरी न हो जाए, तब तक कोई भी अनुमान या बिना पुष्टि के बयान न दिया जाए। मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुंदर मोहन की पीठ ने यह जनहित याचिका खारिज कर दी, जो वकील एम प्रवीण ने दायर की थी। प्रवीण ने अपनी याचिका में कहा था कि अक्सर विमान हादसों के बाद समाचार चैनल, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म बिना किसी पुष्टि के ऐसी खबरें चला देते हैं, जो पायलटों को पहले से ही दोषी ठहरा देती हैं। उन्होंने कहा कि इससे न केवल पायलट की प्रतिष्ठा और करियर को नुकसान होता है, बल्कि उनके आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। उन्होंने 12 जून 2025 में अहमदाबाद विमान दुर्घटना का उदाहरण दिया, जिसमें 260 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना की जांच पूरी होने से पहले ही मीडिया में पायलट को दोषी बताया जाने लगा।
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