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HC: वर्दीधारियों से घर का या निजी काम कराने वाले जेल अधिकारियों पर हो कार्रवाई, मद्रास हाईकोर्ट का निर्देश

Fri, 08 Nov 2024 03:05 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

हाईकोर्ट ने कहा कि यह याद दिलाना न्यायालय का कर्तव्य है कि पुलिस/जेल अधिकारी लोक सेवक हैं और उन्हें करदाताओं के पैसे से अच्छा वेतन दिया जाता है। इसलिए उनसे उम्मीद की जाती है कि वे अधिकारी पद का दुरुपयोग न करें। 
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Madras High Court - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक
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विस्तार
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मद्रास हाईकोर्ट वर्दीधारी कर्मचारियों से घरेलू काम कराने पर सख्त हो गई है। उसने सरकार के  गृह, निषेध एवं आबकारी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव को निर्देश दिया है कि वे विस्तृत जांच करें। साथ ही उन जेल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी आदेश दिया, जो अपने आवासीय या व्यक्तिगत काम वर्दीधारी कर्मियों/लोक सेवकों से करवाते हैं। 

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अदालत ने कहा कि पुलिस की सीबीसीआईडी शाखा की सहायता से या खुफिया शाखा से आवश्यक जानकारी हासिल करके जांच की जा सकती है। 

अगर मिला कोई ऐसा मामला तो...
न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति एम जोतिरमन की खंडपीठ ने हाल ही मे दिए आदेश में कहा कि अगर इस तरह का कोई मामला सामने आया तो अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा उन सभी वर्दीधारी कर्मियों को वापस बुलाने और जेल नियमों एवं सरकारी आदेशों के अनुसार उन्हें जेल ड्यूटी पर तैनात करने के लिए उपयुक्त आदेश जारी किए जाएंगे। पीठ ने कहा कि यह काम अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा तीन सप्ताह की अवधि के भीतर किया जाना था।

सुजाता की याचिका पर दिया अदालत ने आदेश
पीठ ने यह आदेश सुजाता की याचिका पर दिया, जिसमें अधिकारियों को उनके प्रतिवेदन पर विचार करने और फैसला करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। उनकी याचिका में कई शिकायतें थीं, जिनमें से एक यह थी कि अधिकारियों द्वारा वर्दीधारी कर्मचारियों को अपने निजी काम पर रखा जाता है। 
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'पुलिस/जेल अधिकारी लोक सेवक हैं'
पीठ ने कहा कि यह याद दिलाना न्यायालय का कर्तव्य है कि पुलिस/जेल अधिकारी लोक सेवक हैं और उन्हें करदाताओं के पैसे से अच्छा वेतन दिया जाता है। सरकार द्वारा उनके सार्वजनिक कर्तव्यों के प्रभावी काम को देखते हुए अन्य सुविधाएं भी दी गई हैं। इसलिए उनसे उम्मीद की जाती है कि वे अधिकारी पद का दुरुपयोग न करें। अगर वे ऐसा करते पाए गए तो अभियोजन और अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए तैयार रहें। 

अदालत ने आगे कहा कि जेल अधिकारियों के आवासों में वर्दीधारी कर्मियों का तैनात होना कर्तव्य में लापरवाही और/या जेल प्रशासन में चूक होना है। 

घरेलू काम करने के लिए बड़ी संख्या में वार्डन तैनात किए गए थे
जब चेन्नई के पुझल में केंद्रीय कारागार-II में वार्डन के 203 स्वीकृत पद उपलब्ध थे, तब प्रति शिफ्ट 60 वार्डन की जगह केवल 15 वार्डन ही सार्वजनिक कर्तव्यों के लिए तैनात किए गए थे। जेल अधिकारियों के आवासों में घरेलू काम करने के लिए बड़ी संख्या में वार्डन तैनात किए गए थे। पीठ ने कहा कि संवैधानिक न्यायालयों द्वारा किसी भी परिस्थिति में लोक सेवकों के साथ दुर्व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अदालत ने कहा कि जेल अधिकारी लोक सेवक हैं और उनसे जनता के लाभ के लिए सेवा करने की उम्मीद की जाती है। उनसे अपने आवासीय कार्यों के लिए वर्दीधारी कर्मियों को तैनात करने की किसी भी औपनिवेशिक प्रथा का पालन करने की उम्मीद नहीं थी। पीठ ने कहा कि वे न केवल असंवैधानिक काम कर रहे हैं, बल्कि जनता के खिलाफ अपराध कर रहे हैं, जिसके लिए उन पर संबंधित सेवा नियमों और लागू कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

क्या कहा गया याचिका में?
दरअसल, याचिका में कहा गया कि अदालत के कई निर्देशों और आदेशों के बाद भी, उच्च पुलिस अधिकारियों और जेल अधिकारियों के आवासों में वर्दीधारी कर्मियों को तैनात करने की प्रथा पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है। पीठ ने कहा कि इसलिए सरकार द्वारा कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोक सेवकों का उपयोग केवल जनता के कल्याण के लिए किया जाए, न कि अधिकारियों के घरेलू काम करने के लिए।

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