2018 में सबसे बड़े दल होने के बावजूद कांग्रेस बहुमत के दो सीटें कम रह गईं थी। बाद में अन्य दलों के साथ मिलकर इसने सरकार तो बनाई लेकिन सिंधिया समर्थक विधायकों के पाला बदलने सरकार गिर गई। हालांकि, कांग्रेस 2023 के विधानसभा चुनावों में काफी सतर्क नजर आ रही है।
हाल ही में पीएम मोदी 25 सितंबर को मध्यप्रदेश पहुंचे थे। पीएम ने यहां अपने संबोधन में पहली बार वोट करने वाले युवाओं का जिक्र किया था। इसके दूसरे ही दिन मध्यप्रदेश कांग्रेस ने 'फर्स्ट वोट फ़ॉर कांग्रेस' अभियान शुरू कर दिया। इस अभियान के जरिए पार्टी उन वोटर्स पर ज्यादा फोकस कर रही है, जो 2023 के चुनाव में पहली बार मतदान करने जा रहे हैं। ये अभियान कितना जरूरी है, भाजपा भले इसे नहीं समझ पाई, लेकिन कांग्रेस इसे भुनाने जुट गई है।
26 सितंबर को कांग्रेस महासचिव और मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एनएसयूआई का 'फर्स्ट वोट फ़ॉर कांग्रेस' कैंपेन लॉन्च किया। इस अभियान में कांग्रेस की युवा विंग को विशेष रूप से जोड़ा गया है। अब कांग्रेस के कार्यकर्ता उन युवाओं के पास जाकर शिवराज सरकार की नाकामी को गिनाएंगे, जो पहली बार वोट डालने जा रहे हैं। सुरजेवाला का कहना है कि इस कार्यक्रम के जरिए हम युवाओं को यह भी बताएंगे कि अगर प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनी तो युवाओं के लिए क्या-क्या किया जाएगा, उन्हें भर्ती में पारदर्शिता सहित कई वचन दिए जाएंगे।
इसलिए जरूरी है फर्स्ट वोटर
इसलिए भाजपा से नाराज हैं युवा
राज्य में 2003 से भाजपा की सरकार है। जबकि 2005 से शिवराज चौहान मुख्यमंत्री हैं। 2018 में कमलनाथ जरूर सीएम बने लेकिन डेढ़ साल बाद हुए उलटफेर के बाद फिर शिवराज लौट आए। आज प्रदेश में जो युवा 18 वर्ष के हैं, वे 2023 के चुनाव में पहली बार वोट करेंगे, उन्होंने पूरे समय बतौर सीएम शिवराज सिंह चौहान को ही देखा है। शिवराज ने अपने शासनकाल में लाखों की संख्या में सरकारी भर्तियां करवाई हों, लेकिन इस चुनाव के एन पहले वे युवाओं को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं। हाल ही में पटवारी भर्ती परीक्षा में करीब 12 लाख युवा बैठे थे। भर्ती घोटालों के आरोप में सरकार घिरी है। 9000 पटवारी नियुक्ति के लिए सरकार के विरोध में खड़े हैं। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग भी कई सालों से चयनित युवाओं को नियुक्ति नहीं दे पाया है। इसलिए भाजपा और शिवराज से युवा खफा दिख रहे हैं।